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बोलीं नेपाल के प्रधानमंत्री की पत्नी आरजू राणा अद्भुत लग रहा है विश्वनाथ धाम, बाबा से ये ही प्रार्थना है भारत-नेपाल संबंध अनादि काल तक ऐसा ही बना रहे

काशी दौरे पर आए नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा देउबा काशी विश्वनाथ धाम देख कर काफी प्रभावित हुईं। उन्होंने कहा कि वो पांच साल पहले यहां एक पारिवारिक कार्यक्रम के तहत काशी आई थीं, तब से अब तक के बीच काशी में बहुत बड़ा बदलाव आया है। काशी विश्वनाथ धाम देख कर मन प्रसन्न हो गया। अद्भुत हो गया है ये।

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 नेपाल के प्रधानमंत्री की पत्नी आरजू राणा देउबा

नेपाल के प्रधानमंत्री की पत्नी आरजू राणा देउबा

वाराणसी. नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा संग काशी आईं उनकी पत्नी आरजू राणा देउबा को श्री काशी विश्वनाथ धाम दिल से भा गया। उन्होंने कहा कि ये तो अद्भुत हो गया है। इस पूरे क्षेत्र में गजब का परिवर्तन आया है। पांच साल पहले जब एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने यहां आई थीं तो बड़ा लंबा चक्कर काट कर विश्वनाथ मंदिर तक पहुंची थीं। लेकिन इस बार बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंच कर मन प्रसन्न हो गया।

बहुत ही भव्य बना है काशी विश्वनाथ धाम

श्री काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन कर अभिभूत नजर आईं की आरजू राणा देउबा। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम बहुत ही भव्य बना है। बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन कर लगा कि अब सब कुछ मिल गया है। बाबा विश्वनाथ मंदिर से मां गंगा का दर्शन करने का सुवअवसर मिल रहा है। मां गंगा के रास्ते कोई भी विश्वनाथ धाम पहुंच सकता है।

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गंगा भी पहले से काफी स्वच्छ दिख रही हैं और प्रवाह में भी बदलाव दिखा

नेपाल के प्रधानमंत्री की पत्नी ने कहा कि मां गंगा का जल भी पहले से साफ दिखा और जल प्रवाह में भी परिवर्तन आया है। ललिता घाट स्थित हमारे पशुपतिनाथ के मंदिर से भी गंगा बहुत अच्छे से स्वच्छ दिख रही हैं। काशी विश्वनाथ धाम आकर हमारी तो यात्रा सफल हो गई। हमने बाबा विश्वनाथ से अपने देश और भारत के साथ ही विश्व की शांति की कामना की। प्रार्थना की है कि सभी स्वस्थ रहें और सभी प्रगति पथ पर अग्रसर हों।

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पहली बार 1990 में आई थी काशी

आरजू राणा देउबा ने बताया कि वो पहली बार 1990 में काशी आई थी। फिर 2017 में अपनी दीदी के बेटे यानी अपने भतीजे के मुंडन संस्कार में भाग लेने यहां आई थीं। इन पांच सालों में बहुत कुछ बदल गया है। एयरपोर्ट से लेकर काशी विश्वनाथ धाम तक बहुत परिवर्तन नजर आया। ऐसा लगा जैसे कि मैं किसी दूसरे शहर में आ गई हूं।

हमारे लिए भी रामायण और महाभारत का विशेष महत्व

उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल एक ही सभ्यता के अंग हैं। हमारा संयुक्त इतिहास रहा है। हमारे लिए भी रामायण और महाभारत का विशेष महत्व है। राजनीतिक और प्रशासनिक बाउंड्री को छोड़ दें तो भारत और नेपाल के लोग एक हैं। काशी विश्वनाथ और पशुपतिनाथ एक-दूसरे से अलग नहीं है, पौराणिक काल से ही हर जगह उनका उल्लेख मिलता है। नेपाल और भारत का बहुत निकट का संबंध है। यह सदैव यूं ही चलता रहेगा। हम काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी आते हैं तो चार धाम की यात्रा भी हम यहीं कर लेते हैं। यहां के लोग भी उसी तरह से पशुपतिनाथ के दरबार में आते हैं।

काशी में मृत्यु तो मिलता है सीधा स्वर्ग

आरजू राणा देउबा ने कहा कि नेपाल में भी लोग यही मानते हैं कि अगर काशी में मृत्यु हो जाए तो आप सीधे स्वर्ग मिलता है। मेरे कई रिश्तेदारों का यहां घर रहा है। आज भी मान्यता और आस्था में बदलाव नहीं आया है। गंगा का हमारे लिए भी वही धार्मिक महत्व है जो भारत के लोगों के लिए है। यह जरूर है कि अब लोग सांसारिक जंजाल में फंसने के कारण काशी बहुत कम आ पाते हैं। लेकिन, काशी का महत्व किसी के लिए कभी भी कम नहीं हो सकता है।

भारत और नेपाल का संबंध अनादि काल तक ऐसा ही बना रहे

आरजू राणा देउबा ने कहा कि प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा काशी में हुए स्वागत से अभिभूत नजर आए। रविवार का दिन होने के बाद भी हमारे स्वागत के लिए सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ा था। प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा का यह दौरा नेपाल के लिए बहुत अच्छा रहा। भारत बहुत बड़ा देश है। वह नेपाल जैसे छोटे देश को आगे बढ़ने में लगातार मदद कर रहा है। यह दर्शाता है कि अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध को लेकर भारत की कितनी अच्छी सोच है। भारत और नेपाल का संबंध यूं ही अनादि काल तक ऐसा ही रहे, बाबा विश्वनाथ से यही प्रार्थना है।