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तो फिर वरुणा नदी की खुल जायेगी तकदीर, गंगा में भी आयेगी स्वच्छता

३१ दिसम्बर के बाद नहीं गिरेगा सीवर का पानी, जानिए क्या है कहानी
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 13 Oct 2017, 9:23 PM IST

कमिश्रर नितिन रमेश गोकर्ण

कमिश्रर नितिन रमेश गोकर्ण

वाराणसी. इंसानी लालच ने नदियों की सेहत को इतना खराब कर दिया है कि इसका प्रभाव अब पर्यावरण पर स्पष्ट रुप से दिखायी देता है। यूपी चुनाव से पहले तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने वरुणा नदी को बचाने के लिए वरुणा कॉरीडोर प्रोजेक्ट शुरू किया था। काम तेजी से आरंभ हुआ था, लेकिन सपा के विधानसभा चुनाव हारने के बाद इस पर ग्रहण लग गया है। काशी में बन रहे वरुणा कॉरीडोर का कमिश्रर ने निरीक्षण किया था और ३१ दिसम्बर बाद किसी भी हालत में सीवर का पानी नहीं गिरने देने का निर्देश जारी किया है। कमिश्रर नितिन रमेश गोकर्ण के निर्देश का अमल हो जाता है तो वरुणा नदी की तकदीर ही खुल जायेगी। इसका फायदा गंगा नदी में चलाये जा रहे स्वच्छता अभियान पर भी होगा।
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वरुणा कॉरीडोर का पूरा काम मार्च २०१८ में होना है। बीजेपी सरकार में सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर अधिकारियों ने तक ने वरुणा कॉरीडोर का काम तेज करने को कहा है, लेकिन इसका असर कार्यदायी संस्था पर नहीं पड़ता है। कार्यदायी संस्था पर इतनी शिथिल पड़ गयी है कि वरुणा कॉरीडोर के काम को पूरा करने में तेजी नहीं आ रही है। संजोग से इस बार बाढ़ नहीं आयी है इसके बाद भी काम ठप पड़ा है। कमिश्रर नितिन रमेश गोकर्ण ने निरीक्षण करके साफ कर दिया है कि ३१ दिसम्बर तक वरुणा कॉरीडोर में पाइप लाइन डाल दी जाये और उसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ दिया जाये। इससे सीवर का पानी वरुणा में नहीं करेगा।
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दयनीय हो चुकी है वरुणा की स्थिति
वरुणा नदी की स्थिति बहुत दयनीय हो चुकी है। गर्मी की बात क्या की जाये। ठंड के समय भी वरुणा नदी का पानी इतना सूख जाता है कि नदी का स्वरुप नाली में बदल जाता है। वरुणा नदी में जो पानी होता है वह सीवर का होता है। वरुणा नदी का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि उसमे जलीय जीवन भी खत्म हो गया है और सिंचाई में यहां के पानी का उपयोग करने से फसल जहरीली हो सकती है। वरुणा में सीवर गिरने से बंद हो जाने पर नदी की सेहत सुधर जायेगी।
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