24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मानसून सक्रिय होते ही बनारस में जगह-जगह Water logging

-पत्रिका ने पहले ही जताई थी आशंका-नगर निगम के चिह्नित 11 स्थानों से अलग भी Water logging-कई इलाकों में लोगों का घरों से निकलना हुआ मुश्किल

4 min read
Google source verification
Water logging

Water logging

वाराणसी. स्मार्ट सिटी के रूप में तब्दील हो रहा बनारस मानसून के सक्रिय होते ही पानी-पानी हो गया। जिधर भी नजर जा रही है वाटर लागिंग ही नजर आ रहा है। ऐसे कई मोहल्ले हैं जहां लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। विकास कार्यों का आलम यह है कि अभी से सड़कें धंसने लगी हैं। पत्रिका ने अपने पाठकों को तीन दिन पहले ही इस समस्या से वाकिफ कराया था, 'मानसूनी सत्र में बनारसी डूबने को रहें तैयार, अपनी तैयारी से नगर निगम ही आश्वस्त नहीं' खबर से।

वाराणसी में शनिवार से सक्रिय हो गया है मानसून। शनिवार और रविवार को हुई बारिश ने शहर को जलमग्न कर दिया है। जहां देखें वहीं वाटर लागिंग। पिछले दो महीने से पड़ रही भीषण गर्मी से इस बारिश ने जहां लोगों को राहत दी है। पारा गिरा है। वो लोग जो बारिश का इंतजार कर रहे थे उनके चेहरों पर हल्की मुस्कान जरूर आई थी मगर नगर निगम की व्यवस्था ने लोगों को नई परेशानी में डाल दिया है।

ये भी पढें-मानसूनी सत्र में बनारसी डूबने को रहें तैयार, अपनी तैयारी से नगर निगम ही आश्वस्त नहीं

बता दें कि पत्रिका अपने पाठकों को लगातार सचेत कर रहा था कि बारिश हुई तो नगर निगम की लापरवाही का खामियाजा नगरवासियो को भुगतना पड़ेगा। कारण नाले-नालियों की सफाई का काम पूरा हुआ नहीं है। जहां कहीं नाले-नालियों की सफाई की भी गई थी तो नाले-नालियों से निकला सिल्ट वहीं छोड़ दिया गया था जो बारिश में फिर से उन नाले-नालियों में चला गया।

वैसे यह समस्या कोई नई नहीं है। पिछले चार साल से यही समस्या है। आम दिनो में भी मोहल्लों की सीवर लाइन चोक रहती है। सीवर ओवर फ्लो करता दिखता है। लोग घरों से निकल नहीं पाता। फिर बारिश में तो जलभराव स्वाभाविक है। दरअसल सीवर समस्या की जड़ केवल नगर निगम ही नहीं बल्कि जल निगम भी इसके लिए समान रूप से जिम्मेदार है। वजह, 2015 में शहर के शाही नाले की सफाई व मरम्मत का काम शुरू हुआ ये काम 2017 तक पूरा हो जाना था लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि अब मार्च 2020 तक इस काम को पूरा करने की मियाद बढा दी गई है। यहां तक कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जलनिगम के तर्कों से संतुष्ट हो चुके है।

ये भी पढें- दबंग की करतूत, पाट दिया हाल ही में बना नाला, लोग परेशान

शाही नाला की सफाई और मरम्त कार्य में विलंब के लिए जिम्मेदार इस ब्रिटिश कालीन नाले के तीन चौथाई हिस्से तक सिल्ट व गंदे पानी का होना बता रहे है। सूत्र बताते हैं कि जिस तरह से गिरिजाघर से बेनिया और बेनिया से लहुराबीर तक सड़क के ऊपर पाइप लाइन डाल कर नाले के पानी को पंप किया जा रहा है, ठीक उसी तरह अब भैरवनाथ से विशेश्वरगंज और उसके आगे भी पाइप बिछा कर नाले के पानी को पंप करने पर काम किया जा रहा है।

वजह जो हो पर इस नाला की सफाई और मरम्मत से भले ही आगामी 50 साल की सीवर समस्या के समधान का दावा किया गया था, लेकिन फिलहाल पूरा शहर सीवर समस्या और जलभराव से जूझने को बाध्य है।

आलम यह है कि पर्यटन स्थल सारनाथ में हल्की बूंदाबांदी में ही जलजमाव हो गया है। जापानी बौद्ध मंदिर मार्ग, तिब्बती बौद्ध मंदिर, सारनाथ चौराहा, संग्रहालय मार्ग आदि मार्गों पर शनिवार की शाम हुई महज 20 मिनट की बारिश में ही जलभराव हो गया। इससे देशी विदेशी पर्यटको को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ।स्थानीय लोगो का कहना है जब मात्र 15-20 मिनट की बारिश में ये हाल है तो मूसलाधार बारिश होगी उस दिन का हाल क्या होगा? जल जमाव का मुख्य कारण सड़क के दोनों किनारे मानक के विपरीत बनाई गई नई नालिया बताई जा रही है। नाली तो बनाई गई पर पानी के निकास का पता ही नही है जिसके कारण सड़क जलमग्न हो जा रहा है।

ये भी पढ़ें-आकाश में छाए बादल गरज-चमक संग झूम के बरसे, मिली गर्मी से राहत

उधर नक्खी घाट रोड पर सीवर लाइन जाम होने के कारण सड़क पर गंदा पानी जमा हो गया है।

सोना तालाब इलाके का भी यही हाल है।

पैगम्बरपुर में इलाके में भी भरा है सीवर का पानी।