राजगढ़-टहला सड़क मार्ग के मध्य स्थित वन विभाग के कुण्डला नाका के वीरपुर गांव के देवरा की घाटी के समीप एक 10 वर्षीय मादा बघेरा के पैर में चोंट के कारण वो शिकार नहीं कर पाने से भुखी होने व डीहाईड्रेशन के कारण मंगलवार की शाम को करीब सवा 4 बजे उसकी मृत्यु हो गई। कुंडला नाके के वनपाल मनोज कुमार मीना ने बताया कि वीरपुर के देवरा की घाटी के पास मादा बघेरा के पैर में चोंट होने व डीहाईड्रेशन होने पर उसे उपचार के लिए सरिस्का से आ रही रेस्क्यू टीम के आने से पहले ही उसने कुण्डला नाका के स्टाफ के सामने दम तोड़ दिया।
इस मामले की सूचना वन विभाग के उच्चाधिकारियों को दी गई तथा मृतक मादा बघेरे के शव राजगढ़ के क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय परिसर में लाया गया। जहां अलवर के डीएफओ राजेंद्र हुड्डा, राजगढ़ के क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रथम अशोक शर्मा, टहला क्षेत्रीय वन अधिकारी कृष्ण कुमार राजपुरिया, डीएसपी मनीषा मीना, कोतवाल रामजीलाल मीना सहित अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में राजगढ़ पशु चिकित्सालय के डॉ. मोहन लाल मीना, टहला के डॉ . बंशीधर रैगर व सरिस्का के डॉ. दीनदयाल मीना की गठित मेडिकल बोर्ड की टीम से मृतक मादा बघेरा का पोस्टमार्टम करवाकर क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय परिसर में अंतिम संस्कार किया गया।
डीएफओ राजेन्द्र हुड्डा का कहना है राजगढ़ रेन्ज के कुण्डला नाके में मंगलवार को मादा पेंथर की मौत हो गयी। जिसके एक पैर में घाव था। जो कि चल नही पा रहा थी। जिसका चिकित्सको की टीम ने पोस्टमार्टम किया है। मादा बघेरा की डीहाईड्रेशन की वजह से मृत्यु होना बताया गया है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट एक- दो दिन में आ जायेगी। बघेरा काफी वृद्ध था। चिकित्सको के आधार पर उम्र करीब 10 वर्ष है। उन्होंने बताया कि कई बार आपसी झगड़े में पैर में चोंट आ जाती है। तो चल फिरने में परेशानी हुई है। उसकी वजह से खाने का शिकार नहीं कर सकी। इस कारण से मृत्यु हुई है।