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साइबर ठगों से लाखों रुपए की नकदी, आभूषण और कार बरामद… देखें वीडियो …

फर्जी नाम, पते और फर्म के नामे से खोले बैंक खातों में 26 करोड़ का लेनदेन करने वाले दो साइबर ठगों को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पकड़ा है। आरोपी शेयर बाजार, गेङ्क्षमग, फर्जी इंवेस्टमेंट एप्लीकेशन सहित अन्य तरह से साइबर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी के निर्देशन में की गई कार्रवाई में आरोपियों से साइबर टीम ने 9.11 लाख रुपए की नगदी, 10 तोला सोने के आभूषण और एक कार बरामद की है। आरोपियों के पास से 20 मोबाइल, 54 सिम, 10 एटीएम और नोट गिनने की दो मशीन भी मिली हैं। गैंग का सरगना इमरान अली उर्फ विकास सैनी पूर्व में 50 लाख की डिजिटल अरेस्ट के मामले में दिल्ली में गिरफ्तार हो चुका है।

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अलवर

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kailash Sharma

May 29, 2025

खातों में छह महीने में हुए 26 करोड़ के साइबर ठगी के लेनदेन
भिवाड़ी. फर्जी नाम, पते और फर्म के नामे से खोले बैंक खातों में 26 करोड़ का लेनदेन करने वाले दो साइबर ठगों को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पकड़ा है। आरोपी शेयर बाजार, गेङ्क्षमग, फर्जी इंवेस्टमेंट एप्लीकेशन सहित अन्य तरह से साइबर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी के निर्देशन में की गई कार्रवाई में आरोपियों से साइबर टीम ने 9.11 लाख रुपए की नगदी, 10 तोला सोने के आभूषण और एक कार बरामद की है। आरोपियों के पास से 20 मोबाइल, 54 सिम, 10 एटीएम और नोट गिनने की दो मशीन भी मिली हैं। गैंग का सरगना इमरान अली उर्फ विकास सैनी पूर्व में 50 लाख की डिजिटल अरेस्ट के मामले में दिल्ली में गिरफ्तार हो चुका है।
इस तरह फंसाया: एसपी ने बताया कि संजीव निवासी यूआईटी सेक्टर ने 26 अप्रेल को मामला दर्ज कराया। बताया कि एक मार्च को एक मैसेज आया, जिसमें ऑनलाइन इंवेस्टमेंट एप्लीकेशन के बारे में बताया गया। अर्जुन रमेश मेहता नामक व्यक्ति को आप जितना वोङ्क्षटग करेंगे उतना ही कंपनी को लाभ होगा, जिसमें दस प्रतिशत लाभ देने को कहा गया। इसके बारे में ऑनलाइन जानकारी जुटाई, पता चला कि अर्जुन रमेश चुनाव लड़ता है, इसलिए मैंने विश्वास कर लिया, मुझे एक ग्रुप में जोड़ लिया। ग्रुप में सौ नंबर जुड़े हुए थे। वे लोग आपस में लाभ होने के मैसेज डालकर एक दूसरे से संवाद करते थे। मेरे मोबाइल में एक एप्लीकेशन डाउनलोड करा दिया गया।
जांच में सामने आती गई हकीकत
एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी ने बताया कि साइबर थाना प्रभारी आरपीएस जय ङ्क्षसह ने उक्त मामले में अनुसंधान किया। जांच में पता चला कि अपराधी शातिर प्रवृति के हैं। जो इंवेस्टमेंट एप्लीकेशन है, उसका कोई प्रमाणीकरण नहीं है। साइबर टीम ने तकनीकी सहायक से फर्जी एप्लीकेशन से जुड़ी फर्म के बारे में जानकारी जुटाई। कुछ संदिग्ध खातों की जानकारी मिली। एक खाता वीसी कंस्ट्रक्शन नाम से जयपुर का पाया गया। जिसका डायरेक्टर विकास सैनी, उक्त फर्म के अलग बैंक में दस खाते संचालित थे। उक्त खातों में छह महीने में 26 करोड़ का लेनदेन हुआ। विकास सैनी ने फर्जी पहचान व पते से फर्म बनाई। उक्त फर्म का वास्तविक संचालक इमरान अली पुत्र अनवर अली निवासी चांद कॉलोनी विजय नगर ब्यावर है। साइबर टीम विकास सैनी तक पहुंची। जिसके पास विकास नाम के फर्जी आधार कार्ड व अन्य फर्जी पहचान पत्र थे। टीम ने गहनता से पूछताछ की तो उसने अपना नाम इमरान अली बताया। जबकि इसके साथी ने इमरान खान पुत्र जफर मोहम्मद निवासी हनुमानगढ़ होना बताया। दोनों को गिरफ्तार कर छह दिन का पुलिस रिमांड लेकर अनुसंधान किया जा रहा है।