जेपी सीमेंट प्लांट जाने वाले रास्ते में भिलाई इस्पात संयंत्र ने एक चैंबर बना रखा है। इसे आउटलेट चैंबर कहा जाता है। इसमें भिलाई इस्पात संयंत्र का इंडस्ट्रियल वाटर पहुंचता है। यहां से पूरे दिन हजारों लीटर पानी फोर्स के साथ निकल रहा है। चैंबर से पानी लगातार क्यों निकल रहा है, वॉल में खराबी है या पाइप ही फूट चुका है, यह स्पष्ट नहीं है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने कहा कि शनिवार को इसे देखा जाएगा। आखिर पानी चैंबर से क्यों निकल रहा है।
भीषण गर्मी, बरसाती नालों में लबालब पानी
टाउनशिप के नालों में पूरे साल लबालब पानी भरा रहता है। भीषण गर्मी से जहां जिला के कई मोहल्ले में बोरिंग सूख गए हैं। तालाबों में पानी नीचे उतर गया है। ऐसे समय में भी टाउनशिप के सभी बरसाती नालों में पानी भरा हुआ है। पानी का बहाव तक कम नहीं होता है। यहां के सभी नाले बीएसपी से जुड़े हुए हैं।
यहां से निकल रहा पानी
बीएसपी में उपयोग के बाद पानी सेक्टर-5 नाला, तेल्हानाला, खुर्सीपार, पुरैना, भिलाई-3 से निकलता है। यहां के नालों को देखा जा सकता है, कि वे सूखते नहीं है। इसमें पानी लगातार प्लांट से आता रहता है। बीएसपी एक ओर रिसाइकलिंग प्लांट में पानी का उपचार कर पुन: बीएसपी में उपयोग के लिए भेजने का दावा कर रहा है। दूसरे ओर इंडस्ट्रियल वाटर की बर्बादी साफ नजर आ रही है।
बीएसपी में उपयोग करते आता है रॉ-वाटर
भिलाई इस्पात संयंत्र के पास तांदुला जलाशय से मरोदा-2 में रॉ वाटर आता है। मरोदा-2 से इस रॉ-वाटर को दो हिस्सों में बांट दिया जाता है। एक हिस्सा संयंत्र के भीतर स्थित जलाशय मरोदा-1 को भेजा जाता है। दूसरा हिस्सा जल शोधक संयंत्र में भेजा जाता है। जलाशय मरोदा 1 के लिए जिस पानी को भेजा जाता है, उसका ही आउटलेट इस चैंबर को बताया जा रहा है। जिससे हजारों लीटर पानी नाला में जा रहा है।
यहां होता है उपयोग
संयंत्र में स्थित मरोदा-1 जलाशय के पानी का उपयोग औद्योगिक कार्य के लिए किया जाता है। इसे संयंत्र के फर्नेस, कूलिंग बेड वगैरह में भेजा जाता है। यहां पानी की 24 घंटे जरूरत पड़ती है। फर्नेस को चारों से ठंडा यह पानी ही रखता है।https://www.patrika.com/dharma-karma/watch-the-video-women-kept-fast-and-worshipped-banyan-tree-18752641