
दौसा. जिले के सिकंदरा, मानपुर, गीजगढ़ सहित अन्य कस्बों मेें दिनोंदिन सिलिकोसिस बीमारी पांव पसारती जा रही है, लेकिन बीमारी की रोकथाम के लिए ना तो सरकार गम्भीर है और ना ही यहां के जनप्रतिनिधि। ऐसे में पत्थर कलाकृति को देश ही नहीं विदेशों में भी पहचान दिलाने वाले श्रमिकों की एक के बाद एक मौत हो रही है। रविवार सुबह भी क्षेत्र में एक श्रमिक की मौत हो गई। जिससे दो बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, वहीं परिवार के सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है। इससे पहले इसी बीमारी से करीब 500 से अधिक श्रमिकों की मौत हो चुकी है, वहीं सैकड़ों श्रमिक जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
Silicosis … सिलिकोसिस बीमारी से लगातार पत्थर श्रमिकों की मौत हो रही है। पिछले दो साल में सैंकड़ों श्रमिकों के परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मृतकों के बच्चों को पढ़ाई छोड़कऱ दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर होना पड़ रहा है, लेकिन इन परिवारों की मदद के लिए ना तो सरकार कोई कदम उठा रही है और ना ही यंहा के जनप्रतिनिधि। श्रमिकों की मौत के बाद क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी श्रमिकों के परिवारों को आर्थिक मदद तो दूर की बात कोई दिलासा देने के लिए भी नहीं पहुंचता।
silicosis… श्रमिकों के परिजनों के मुताबिक सरकार ने श्रमिकों के कार्ड तो बनवा दिए, लेकिन ना तो उपचार के लिए मुआवजा मिलता है और ना ही मौत के बाद सहायता राशि। ऐसे में लाखों रुपए उपचार में खर्च होने के बाद भी परिवार के मुखिया की मौत के बाद कर्ज चुकाना तो दूर, पेट भरने के भी लाले पड़ रहे हैं। सिकराय तहसील क्षेत्र के मानपुर, बहरावंड़ा, सिकंदरा, गीजगढ़ सहित अन्य कस्बों में बड़े स्तर पर पत्थर नक्काशी का काम करने वाले 500 से अधिक श्रमिक सिलिकोसिस से जान गंवा चुके हैं व दो हजार के लगभग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। राणापाड़ा की गोला वाली ढ़ाणी में सिलिकोसिस बीमारी के चलते दम तोड़ दिया। सरपंच रामवतार सैनी ने बताया कि सुरज्ञान सैनी पिछले कई साल से सिलिकोसिस से पीडि़त था।
silicosis… परिजन जयपुर व दौसा सहित अन्य अस्पतालों में लाखों रुपए खर्च कर उपचार करवाया। लेकिन इस बीमारी का कहीं भी उपचार नही मिला। मृ़तक को सरकार से उपचार के लिए एक लाख रुपए की सहायता राशि मिली थी, लेकिन कई वर्षों से उपचार के चलते कर्ज अधिक होने के बाद परिजन घर लाकर ही दवा दिलवा रहे थे, लेकिन रविवार सुबह तबीयत बिगडऩे पर श्रमिक की मौत हो गई। मृतक के दो मासूम बेटों के सिर से पिता का साया उठ गया। परिजनों ने बताया कि परिवार में एक ही कमाने वाला था, जिसकी मौत हो गई। अब परिवार को कर्ज चुकाना तो दूर पेट भरने के लिए भी कुछ नहीं है।