
महिलाओं को राजनीति से दूर रखने का काम पार्टियां अपने संगठन से ही शुरू कर देती हैं। तभी तो कांग्रेस के संगठन में मात्र 14 प्रतिशत तो भाजपा संगठन में 10 प्रतिशत पदों पर महिलाएं हैं। हैरानी की बात यह है कि दोनों पार्टियों की ओर से महिला प्रत्याशियों को दावेदारी भी इतना प्रतिशत ही दिया गया है। भाजपा ने 10 तो कांग्रेस ने 14 प्रतिशत महिला उम्मीदवार ही मैदान में उतारे हैं। संगठन में काम कर रही महिलाओं की बात करें तो इनमें भी बहुत कम संख्या उन महिलाओं की है, जिन्हें पार्टी ने टिकट दिए हैं। पार्टी के लिए काम करने वाली कार्यकताओं को ही राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया जा रहा तो आम महिला की पहुंच राजनीति में कैसे होगी? यह भी बड़ा सवाल अभी महिलाओं के सामने है