जयपुर . माघ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी आज से गुप्त नवरात्र शुरू हो गए हैं। गुप्त साधना करने वाले साधक प्रात: शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से घट स्थापना कर मां दुर्गा की साधना शुरू की। गलतागेट स्थित मंदिर श्री गीता गायत्री में पं. राजकुमार चतुर्वेदी के सान्निध्य में घट स्थापना की गई। माता गीता गायत्री का अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण करवा कर मनमोहक शृंगार किया गया। इस मौके पर हवन व दुर्गा सप्तशति का पाठ किया गया।
चतुर्थी तिथि क्षय होने से गुप्त नवरात्र पर्व इस बार आठ दिन के ही होंगे। इन दिनों में साधक आदि शक्ति दुर्गा की दस विद्याओं की साधना करेंगे। तंत्र-मंत्र से साधना करने वाले लोग नवरात्र में सिद्धि प्राप्ति के लिए मां भगवती के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करेंगे। कलश स्थापना से शुरू हुए देवी आराधना के इस पर्व का समापन 6 फरवरी को होगा।
हिन्दू पंचांग के अनुसार साल में चार बार नवरात्र पड़ते हैं। इनमें दो दृश्य एवं दो गुप्त आते हैं। चैत्र एवं आसोज मास में आने वाले नवरात्र की सभी को जानकारी होती है, जिसके चलते सभी लोग इन नवरात्र को मनाते हैं, जबकि माघ एवं आषाढ़ मास में नवरात्र के बारे में अधिकांश लोगों को जानकारी नहीं होने लोग इन्हें गुप्त नवरात्र कहते है। इस नवरात्र में साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां की साधना में लीन होंगे।
तंत्र साधना के लिए महत्वपूर्ण
पंडित सुरेश कुमार शास्त्री के अनुसार देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं। गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या तंत्र साधना के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, मां धु्मावती, माता बगलामुखी, मातंगी व कमला देवी की तंत्र साधना करते हैं।