30 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जोधपुर
पोकरण ने देश को तो महाशक्ति बनाया, लेकिन हमारे गांव को मिला कैंसर-अपंगता
Play video

पोकरण ने देश को तो महाशक्ति बनाया, लेकिन हमारे गांव को मिला कैंसर-अपंगता

-ग्राउंड रिपोर्ट- -दुनिया में भारत का मान बढ़ाने वाला गांव खेतोलाई दशकों बाद भी अकाल जैसे हालात से जूझ रहा है-पत्रिका टीम ने खेतोलाई गांव जाकर जाने हालात, जहां 20 वर्ष पहले हुआ था परमाणु परीक्षण
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जोधपुर

•

image

Kanaram Mundiyar

•

Updated: 29 Nov 2018, 9:51 AM IST

शैलेन्द्र पाण्डेय और के. आर. मुण्डियार
पोकरण.
भारत सरकार की ओर से वर्ष 1974 में एक व वर्ष 1998 में दो दिन में पांच परमाणु परीक्षण के बाद जैसलमेर जिले का पोकरण क्षेत्र देश-दुनिया में सुर्खियों में आ गया। दुश्मन देश तक पोकरण पर सीधी नजर रखने लगे। वर्ष 2008 में नए परिसीमन के बाद नवगठित विधानसभा सीट के रूप में पोकरण चुनाव में गर्माई सियासत को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
राजनैतिक दलों की ओर से जुमलों के जरिए जनता को फिर विकास के सपने दिखाए जा रहे हैं और विकास के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिस पोकरण के कारण भारत पूरी दुनिया में महाशक्ति बनकर उभरा है। इस पोकरण विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान जमीनी हालात क्या हैं। यह भी जानना भी जरूरी है। इसलिए पत्रिका टीम ने पोकरण की नब्ज जानने की शुरूआत उसी जगह यानि खेतोलाई से ही की, जहां पर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने मई 1998 में दो दिन में एक के बाद एक कुल पांच परमाणु बम के परीक्षण किए थे।

 

परमाणु परीक्षण होने के बाद रातों-रात खेतोलाई गांव भी दुनिया भर चमका तो यहां के लोगों की उम्मीदें भी जगी कि अब तो उनके गांव पर सत्ता व सरकार की सीधी नजर रहेगी और विकास की कोई कमी नहीं रहेगी। लेकिन खेतोलाई में बीस साल में ज्यादा कुछ नहीं बदला। लोग मुलभूत सुविधाओं को आज भी तरस रहे हैं। न सड़क है और न पेयजल का कोई इंतजाम हैं। पशुधन के लिए चारा-पानी का इंतजाम भी मुश्किल हो रहा है। गांव के मौजिज सेवानिवृत शिक्षक मांगीलाल अज्ञात ने कहा कि परमाणु परीक्षण के कारण खेतोलाई गांव के नाम से हर किसी को गर्व होता है। देश-दुनिया तक पहचान हैं, लेकिन गांव बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है।

परमाणु परीक्षण ने गांव को कैंसर, खुजली जैसी बीमारियों के दंश दिए हैं। कई लोगों की गुपचुप मौतें हो रही है। इंसान ही नहीं मवेशी भी रेडिएशन के प्रभाव के कारण अपंग, अंधेपन के शिकार हो रहे हैं। बीमार गायों का दूध सेवन करने से बीमारी इंसानों तक पहुंच रही है। गांव में चिकित्सा-सुविधा नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का नया भवन तो बना दिया, लेकिन वह भी शुरू नहीं किया गया। युवा पंकज विश्नोई ने कहा कि हर चुनाव में नेता विकास व चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने व पेयजल आपूर्ति के आश्वासन देते रहे हैं, लेकिन चुनाव के बाद कोई पलटकर नहीं देखता। कुछ समय पहले खेतोलाई को बिलिया स्थित पोकरण-फलसूण्ड पेयजल लिफ्ट परियोजना के हैडवक्र्स की लाइन से जोड़ा गया, लेकिन इस कनेक्शन का पानी गांव के बाहर तक ही पहुंचा है। गांव के अंदर जीएलआर सूखे हैं। जीएलआर के पाइप टूटे हैं, खेलियां जर्जर है। लोगों को टैंकरों के जरिए पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

 

मानाराम विश्नोई ने कहा कि पानी की समस्या का मुद्दा विधायक के समक्ष उठाया तो उसकी पुत्रवधु का तबादला पाकिस्तान बॉर्डर के पास कर दिया गया। इसलिए लोग अपनी परेशानी भी किसी के समक्ष बता भी नहीं सकते। ग्रामीणों ने बताया कि अकाल जैसे हालात में काश्तकारों के समक्ष अपने पशुधन बचाने के लिए चारे-पानी का इंतजाम भी मुश्किल हो रहा है।


कनेक्टिविटी से कट रहा पोकरण-
पोकरण में लम्बी दूरी की एक्सप्रेसों ट्रेनों की कनेक्टिविटी नहीं बढ़ रही है। विरेन्द्र मेवाड़ा का कहना है कि जैसलमेर-बीकानेर-जयपुर एक्सप्रेस, रानीखेत एक्सप्रेस, हावड़ा एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें पोकरण रेलवे स्टेशन नहीं आकर बाइपास ही गुजर जाती है। ऐसे में पोकरण शहर कनेक्टिविटी से कट रहा है। रेलवे स्टेशन को बचाने एवं ट्रेनों को पोकरण स्टेशन लाने के लिए जनता के कई बार आंदोलन भी किए, लेकिन नेताओं ने ट्रेनों के ठहराव के लिए कोई प्रभावी प्रयास नहीं किए।


गांवों में पानी को तरस रहे लोग-
पोकरण शहर में तो इंदिरा गांधी नहर का पानी आ रहा है। लेकिन शहर के आस-पास कुछ गांवों को छोड़कर अधिकतर गांवों को नहर के पानी का इंतजार है। खेतोलाई भी अन्य गांवों की तरह नहरी पानी की सप्लाई से दूर है।


स्वास्थ्य सुविधाओं के हाल-
दो बड़े राजमार्गों से जुड़े पोकरण शहर में चिकित्सा सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सकों के 25 में से 10 पद रिक्त है। वरिष्ठ विशेषज्ञ के सभी पद खाली है। ट्रोमा अस्पताल नहीं होने के कारण इमरजेंसी में गंभीर मरीजों व घायलों को ृ175 किलोमीटर दूर जोधपुर संभाग के अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।


काश्तकारों की समस्या-
इस क्षेत्र की आजीविका का प्रमुख साधन कृषि व पशुपालन पर टिका है। लेकिन यहां कृषि उपज मंडी नहीं है। ऐसे में काश्तकारों को जोधपुर मंडी एवं फलोदी मंडी जाकर अपना अनाज बेचना पड़ रहा है। वहीं बीमार पशुओं के इलाज के लिए ग्रामीण क्षेत्र में सुविधाएं नहीं हैं। पोकरण शहर के पशु चिकित्सालय में भी पर्याप्त सुविधा व स्टाफ नहीं है।


पोकरण शहर के हालात-
शहर में सड़क-नालियों के हालात अच्छे नहीं हैं। बेहाल सड़कों के कारण कस्बे के हालात गांव जैसे हैं। सीवरेज तंत्र बिगड़ा हुआ है। अस्थाई अतिक्रमण, आवारा पशु एवं बेलगाम यातायात भी बड़ी परेशानी है। दोनों महाविद्यालय (गल्र्स व बॉयज) में 15 व्याख्याताओं व दोनों प्राचार्यों के पद रिक्त है। ग्रामीण क्षेत्र की स्कूली शिक्षा ढांचे में भी सुधार की दरकार है। पोकरण शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध रामदेवरा तीर्थ स्थल है, यहां हर साल मेला भरता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन यहां भी सुविधाओं की दरकार है।

अब तक 15 लोगों की मौत-
खेतोलाई के सेवानिवृत व्याख्याता मांगीलाल विश्नोई का दावा है कि परमाणु परीक्षण के बाद 20 साल में खेतोलाई में 15 लोगों की मौत रेडिएशन के प्रभाव के कारण कैंसर व हृद्य रोग से हो चुकी है। प्रशासन को कई बार अवगत कराया, लेकिन आज तक गांव में रेडिएशन के प्रभाव का सर्वे नहीं किया गया। गांव के 75 वर्षीय सेवानिवृत सैनिक साजनराम विश्नोई के मुंह में गांठ का कैंसर हैं। साजनराम जोधपुर एम्स में इलाज ले चुके हैं। साजन की पत्नी नत्थीदेवी को खुजली की परेशानी है। लोगों का कहना है कि एक दशक से महिलाओं के गर्भाशय में कैंसर की गांठें होने की परेशानी भी बढ़ रही है। वहीं पशुधन में भी गांठों की बीमारियां बढ़ रही है। गौ धन में गर्भपात भी हो रहा है।


नहीं हो रहा रेडिएशन से कैंसर-
खेतोलाई में रेडिएशन के कारण कैंसर व अन्य रोग होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। कैंसर अन्य कारणों से भी होता है। वातावरण व मिट्टी या पानी रेडिएशन है या नहीं हैं, इसकी जांच मेडिकल कॉलेज स्तर पर ही की जा सकती है। अभी तक ऐसी जांच खेतोलाई में नहीं की गई। इस तरह की जांच की जाएं तो लोगों का संदेह दूर हो सकता है।
-डॉ. बीएल गर्ग, प्रभारी चिकित्सक, राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पोकरण

 

इसलिए चर्चा में आई सीट-
भाजपा व कांग्रेस के प्रत्याशी उतारने के बाद पोकरण प्रदेश में हॉट सीट शुमार हो गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी व भाजपा के स्टार प्रचारक व उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभाएं कर चुके हैं। भाजपा ने हिन्दुत्व कार्ड का सहारा लिया है तो कांग्रेस समानता की बात को बल दे रही है। पोकरण सभा में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर देश का अपमान करने के आरोप लगाए और किसानों व बेरोजगारों के लिए वादे कर लुभाने की कोशिश की। वहीं भाजपा के योगी ने तीखे तेवर में कांग्रेस पर आतंकवाद व नक्सलवाद, अलगाववाद विचाराधारा पैदा करने के आरोप लगाए। उन्होंने भाजपा के लिए राष्ट्रधर्म व राष्ट्रहित को सर्वोपरि बताया और कहा कि भाजपा के राज में ही रामराज्य आएगा।

गत दो चुनाव परिणाम: एक नजर
वर्ष 2008-
कांग्रेस के Shale मोहम्मद 339 मतों के अंतर से जीते (42756 मत मिले)
पराजित भाजपा प्रत्याशी शैतानसिंह राठौड़ को 42417 मत मिले
वर्ष 2013-
भाजपा के शैतानसिंह राठौड़ 34444 मतों के अंतर से जीते (85010 मत मिले)
पराजित कांग्रेस प्रत्याशी Shale मोहम्मद को 50566 मत मिले।

चुनाव मैदान में प्रत्याशी-
प्रतापपुरी-भाजपा
Shale मोहम्मद- कांग्रेस
तुलछाराम- बसपा
परमाराम- निर्दलीय
पुखराज- निर्दलीय

 


विधानसभा प्रोफाइल-
कुल वोटर- 194552
पुरूष- 102727
महिला- 91825
नए वोटर जोड़े गए- 28000

मतदान केन्द्र- 258, कुल प्रत्याशी -5