
कानपुर। कांग्रेस, सपा, बसपा के बाद बीजेपी में भी अदंरखाने जबरदस्त गुटबाजी चल रही है। सरकार और संगठन के नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग अदंरखाने पिछले एक साल से चली आ रही है, जिसे ठीक करने के लिए हाईकमान लगा हुआ था, लेकिन अब अनुशासित पार्टी का दंभ भरने वाली पार्टी बेपर्दा हो गई। कमल संदेश यात्रा के दौरान के दौरान दो गुट आपस में भिड़ गए और एक-दूसरे पर जमकर लाल-घूसे बरसाए। दोनों तरह से किदवईनगर थाने में तहरीर दी गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं क्षेत्रीय अध्यक्ष परमजीत सिंह ने बताया कि अमरजीज सिंह निकाय चुनाव के दौरान अखिलेश यादव की उम्मीदवार माया गुप्ता के साथ रहे। साथ ही इनके समाजवादी पार्टी के नेताओं से गहरे रिश्ते हैं और वो भाजपा के बजाए विरोधी दलों के लिए काम कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
कमल संदेश यात्रा के तहत बृजेंद्र स्वरूप पार्क में रैली शुरू होने से पहले गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। जमकर लात-घूंसे चले। इसके बाद साकेत नगर रेलवे मैदान में समापन के दौरान मंच पर चढऩे को लेकर अमरजीत पम्मी को वरिष्ठ नेताओं के सामने ही कार्यकर्ताओं ने बुरी तरह पीट दिया। कुर्सियां तक उठा लीं, लेकिन कुछ नेताओं ने बीच-बचाव कराया। अमरजीत का आरोप है कि मोर्चा के प्रदेशमंत्री गुरूविदंर सिंह, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष परमजीत सिंह उर्फ पम्मा और उनके तीन समर्थकों ने समापन मंच में पार्टी पदाधिकारियों के सामने मेरे साथ मारपीट की और मंच से धक्का देकर उतार दिया। अमरजीम की तहरीर पर किदवईनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।
अमरजीत के खिलाफ मकुदमा
मोर्चे के के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष परमजीत उर्फ पम्पा ने अमरजीत सिंह के खिलाफ तहरीर दी है। आरोप लगाते हुए बताया कि, अमरजीत सिंह भाजपा के सदस्य नहीं हैं। उन्हें 32 अक्टूबर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बावजूद वो कमल संदेश यात्रा में असलहा लेकर शामिल हुए। समापन मंच पर चढ़ा देख प्रभारी मंत्री बाबूराम निषाद की सुरक्षा के लिहाज से उन्हें मंच से उतरने को कहा गया, तो वो गाली-गलौज, मारपीट के साथ असलहा निकाल कर जान से मारने की धमकी दी। किदवईनगर इस्पेक्टर ने बताया कि तहरीर के आधार पर अमरजीत सिं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
सरकार बनने के बाद बंटी भाजपा
यूपी की बागडोर जैसे ही योगी आदित्यनाथ के मिली, वैसे ही पार्टी दो गुटों में बंट गई। एक गुट के साथ सरकार के कद्दावर नेता हैं तो दूसरे के सिर पर संगठन का हाथ है। नगर निगम चुनाव के दौरान टिकट वितरण को खींचतान मची। अपने-अपने समर्थकों को टिकट दिलाने को लेकर शुरू हुई खींचतान जीत के जश्न में छिप तो गई, लेकिन शांत नहीं हुई। इससे पहले विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर हार इसी गुटबाजी की देन मानी जाती है। आर्यनगर व कैंट सीट पर मिली हार के बाद नगर अध्यक्ष की तरफ से एक रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष के पास भेजी गई थी। जिसमें हार के कारणों का जिक्र किया गया था।
मेयर का भी हुआ अपमान
कमल संदेश यात्रा भी एकजुटता की ताकत दिखाने के लिए ही थी। मगर, इसमें महापौर प्रमिला पांडेय का अपमान सार्वजनिक रूप से किया गया। अपने पद से ज्यादा संगठन को अहमियत देते वह तो शांति से कार्यक्रम से चली गई। इस घटनाक्रम के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई है। खास तौर पर पार्षद अपनी महापौर के अपमान से आहत हैं और उनके साथ कार्यक्रम में 110 वार्डो से पहुंचे कार्यकर्ता भी। जानकारों की मानें तो सरकार और संगठन के दो कद्दावर नेता एक साथ हैं और उन्हीं के कहने पर छाबड़ा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।