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गुरु नानक जयंती: गूंजी शबद कीर्तन की स्वर लहरियां, सिख संगत ने पंगत में चखा लंगर
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गुरु नानक जयंती: गूंजी शबद कीर्तन की स्वर लहरियां, सिख संगत ने पंगत में चखा लंगर

सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व बुधवार को मोहन नगर स्थित गुरुद्वारे में धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। गुरु नानक जयंती के उपलक्ष्य में 9 दिवसीय प्रभात फेरी के समापन हुआ। प्रकाशोत्सव पर सुबह गुरुद्वारे में गुरुग्रंथ साहिब के दीवान को फूलों और मालाओं से सजाया गया। जहां शहर की सिख संगत ने सुखमणि साहिब का सामूहिक पाठ किया।

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हिण्डौनसिटी. सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व बुधवार को मोहन नगर स्थित गुरुद्वारे में धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। गुरु नानक जयंती के उपलक्ष्य में 9 दिवसीय प्रभात फेरी के समापन हुआ।
प्रकाशोत्सव पर सुबह गुरुद्वारे में गुरुग्रंथ साहिब के दीवान को फूलों और मालाओं से सजाया गया। जहां शहर की सिख संगत ने सुखमणि साहिब का सामूहिक पाठ किया।
दोपहर में मोहन नगर के महिला जत्था की ओर से नेहा चोपड़ा, दिव्या, हर्ष, विमला और रानी गुलाटी ने शबद-कीर्तन किया। तबला, ढोलक, मंजीरों आदि वाद्ययंत्रों के साथ शबद कीर्तन की स्वर लहरियों से माहौल भक्ति रस से सराबोर हो गया। गुरुद्वारे के ज्ञानी जोगिन्दरसिंह ने कौमी एकता और विश्व शांति के लिए अरदास करवाई। जिसमें सिख धर्म के सैकड़ों महिला, पुरुष व बच्चों ने गुरुग्रंथ साहिब के दीवानके समक्ष मत्था टेकर कर खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम के समापन पर अटूट लंगर का आयोजन किया गया। जिसमें सारी संगत ने पंगत में बैठकर प्रसादी ग्रहण की। गुरुद्वारा परिसर ‘बोले सो निहाल… सत श्री अकाल’ और ‘वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह’ के उद्घोषों से गुंजायमान हो गया।

बच्चों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुति
गुरुद्वारा में अरदास के उपरांत दोपहर में सिख बच्चों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। बच्चों ने गुरु नानक देव जी के जीवन और शिक्षाओं को जीवंत कर दिया। साथ ही पंजाबी बोली में गुुरु नानक जी के भजन व धार्मिक संदेश देने वाली कविताओं का पाठ किया। प्रतिभागियों को गुरुद्वारा प्रबंध समिति के सचिव डॉ. बलजीत सिंह ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

रोशनी से जगमगाया गुरुद्वारा
शाम को गुरुद्वारे को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया, जिससे पूरे परिसर में दिव्यता और उल्लास का वातावरण बना रहा। प्रकाश पर्व के इस पावन अवसर पर धर्मचर्चा में डॉ.तरणजीतसिंह मक्कड, बलजीतसिंह सूरी सहित अन्य प्रबुद्धनों ने गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को आत्मसात करने पर जोर दिया।