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VIDEO: भोपाल से पहुंचा जांच दल, निर्माणाधीन कटनी नदी पुल के टूटने की जांच में पाई ये बड़ी गलती

- कटनी नदी में निर्माणाधीन पुल का हिस्सा धंसकने की जांच करने शुक्रवार को भोपाल से मुख्य अभियंता एआर सिंह लैब कर्मचारियों के साथ पहुंचे। मुख्य अभियंता और उनकी टीम ने तीन घंटे से ज्यादा समय तक कटनी नदी पर निर्माणाधीन पुल और उस हिस्से की जांच की जो धसक गया है। - प्रारंभिक जांच उपरांत उन्होंने कहा कि पुल ढलाई के दौरान गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। बता दें कि साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे पुल का निर्माण 2008 से हो रहा है। - कई बार पुल निर्माण का ड्राइंग डिजाइन बदली गई। जांच के लिए पहुंची सेंटर पीडब्ल्यूडी लैबोटरी की टीम ने पुल में अलग-अलग हिस्से से मशीन से ड्रिल कर कोर कटिंग के सैंपल लिए।

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Balmeek Pandey

Jul 27, 2019

कटनी. कटनी नदी में निर्माणाधीन पुल का हिस्सा धंसकने की जांच करने शुक्रवार को भोपाल से मुख्य अभियंता एआर सिंह लैब कर्मचारियों के साथ पहुंचे। मुख्य अभियंता और उनकी टीम ने तीन घंटे से ज्यादा समय तक कटनी नदी पर निर्माणाधीन पुल और उस हिस्से की जांच की जो धसक गया है। प्रारंभिक जांच उपरांत उन्होंने कहा कि पुल ढलाई के दौरान गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। बता दें कि साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे पुल का निर्माण 2008 से हो रहा है। कई बार पुल निर्माण का ड्राइंग डिजाइन बदली गई। जांच के लिए पहुंची सेंटर पीडब्ल्यूडी लैबोटरी की टीम ने पुल में अलग-अलग हिस्से से मशीन से ड्रिल कर कोर कटिंग के सैंपल लिए। सैंपल की जांच में भोपाल लैबोटरी में होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान यह भी बात सामने आई है कि ठेकेदार का नेताओं के साथ बढिय़ा तालमेल होने के कारण वे अपने हिसाब से ही पुल बना रहा था। 2011 में वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद 2013 तक मुआवजा आदि का पेंच फंसा रहा। हालांकि 2013 में ही काम शुरू हो गया था। ठेकेदार द्वारा धनुषाकार पुल के लिए फाउंडेशन बना लिया गया था, 90 मीटर का पुल बनना था, लेकिन उसकी डिजाइन ठकेदार द्वारा बदलवा ली गई। इसके लिए दो साल तक काम रोककर रखा। इसके बाद 45-45 मीटर पिलर का प्रापोजल 2016 में भेजा और 2017 में पास कराने के बाद काम तो शुरू किया गया, लेकिन धीमी गति से। गुणवत्ता विहीन कार्य कराए जाने से स्लैब हादसे का शिकार हो गया।

क्रांकीट में गिट्टी का ज्यादा उपयोग
प्रारंभिक जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि पुल निर्माण के दौरान ठेकेदार द्वारा निर्धारित मात्रा में सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। स्लैब ढलाई के कांक्रीट में गिट्टी मात्रा अधिक थी, सीमेंट का उपयोग की कम मात्रा में होने के कारण केबिल स्टेचिंग के दौरान तेज धमाके के साथ पुल धसक गया। ठेकेदार द्वारा कार्य की मॉनीटरिंग न किए जाने के कारण इंजीनियर व कर्मचारियों ने अपने हिसाब से स्लैब को ढलवा दिया और यह हादसा हो गया।

 

बड़ा खुलासा: …तो इसलिए धसक गया चार करोड़ के निर्माणाधीन पुल का हिस्सा, देखें वीडियो

 

साढ़े तीन घंटे तक चली जांच
साढ़े 12 बजे टीम कटनी नदी पुल पहुंची। पहले अधिकारियों ने चारों तरफ से पुल का मौका मुआयना किया और फिर ब्रिज के नीचे अधिकारी-कर्मचारियों की मीटिंग ली। इसके बाद जांच शुरू हुआ। कोर कटिंग मशीन को पुल के ऊपर ले जाया गया। ब्रिज की नापजोख करने के बाद मशीन से कोर कटिंग शुरू हुई। दो अलग-अलग स्थानों की कोर कटिंग ली गई और फिर उसे लैब में जांच करने के लिए सुरिक्षत जांच वाहन में रखा गया।

 

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फिर तोड़कर बनाया जाएगा पुल
एआर सिंह चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी ब्रिज जोन भोपाल ने बताया कि पुल अब फिर से तोड़कर बनाया जाएगा। हैरानी की बात तो यह है कि 2008 से बन रहा यह पुल 2019 तक पूरा नहीं हो पाया था अब निर्माण की नीव फिर से रखी जाएगा। ऐसे में अब लंबावक्त लग सकता है। वहीं विभाग ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने के बाद फिर से उसी को काम सौंपने के मूड में है। ऐसे में शहर की जनता के लिए फिर से कई साल के लिए परेशानी बढ़ाई जा रही है।

 

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जांच में ये रहे शामिल
जांच टीम में एआर सिंह चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी ब्रिज जोन भोपाल, एसइ खरे, सेंटर लैब के अधिकारी-कर्मचारी, इस दौरान निलंबित किए गए अधिकारी प्रभारी कार्यपालन यंत्री दिनेश कौरव, अनुविभागीय अधिकारी योगेश वत्सल, उपयंत्री राजेश खरे सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

खास-खास:
– शुरुआत में 6 मीटर बाद धसका पुल। 43.700 मीटर लंबाई और 11.90 मीटर चौड़ाई में हुई थी पुल की ढलाई।
– पूरे मामले में गंभीर बेपरवाही सामने आई है। ठेकेदार द्वारा काम की मॉनीटरिंग नहीं की जा रही थी।
– कर्मचारी व मजदूरों के भरोसे काम चल रहा था। अधिकारी भी निरीक्षण पर पहुंचते थे तो उन्हें ठेकेदार के न होने पर परेशानी होती थी।
– ढलाई के बाद तय उपकरणों का नहीं किया गया उपयोग, ठेकेदार के कर्मचारी और विभाग के अधिकारियों ने अपने हिसाब से कराया है काम।

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जांच अधिकारी मुख्य अभियंता से पत्रिका की सीधी बात
सवाल- किस कारण से निर्माणाधीन पुल चटका?
जवाब- कटनी नदी में सेतु निगम द्वारा पुल बनवाया जा रहा है। शासन द्वारा 2008 में स्वीकृति दी गई थी। 2011 से ठेकेदार द्वारा काम किया जा रहा है। कुछ डिस्प्यूट व स्पॉन एरेंजमेंट के कारण निर्माण में डिले हुआ है। 101 मीटर लंबाई का पुल बन रहा है। 45-45 मीटर के सेंटर स्पॉन डाले जाने थे। एक स्पॉन ही अभी पड़ा था।
सवाल- जांच के दौरान क्या कमी पाई गई?
जवाब- निरीक्षण में पाया गया कि ठेकेदार का पुल के स्लैब में कांक्रीट का काम फेल हुआ है। जिसके कारण स्लैब स्टेचिंग के दौरान उठ गया और एक तरफ का हिस्सा धसक गया।
सवाल- लगतार विभाग की निगरानी के बाद यह गड़बड़ी कैसे?
जवाब- ठेकेदार की इसमें लापरवाही है, प्रॉपर निरीक्षण नहीं किया गया। मंत्री ने ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया। लोक निर्माण विभाग में मप्र मेें कहीं ठेका नहीं ले सकता। अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है।
सवाल- ठेकेदार की ही ड्राइंग डिजाइन क्यों?
जवाब- ठेकेदार द्वारा अपनी ड्राइंग डिजाइन सबमिट की गई है। हालांकि डिजाइन ठीक थी। अन्य एजेंसियां भी इस मामले की जांच करेंगी तो स्थिति और भी स्पष्ट होगी।
सवाल- कार्रवाई के बाद भी क्यों कराया काम?
जवाब- इस ठेकेदार को कई मौके दिए। पूर्व में भी ब्लैक लिस्टेड किया गया। रिक्वेस्ट पर बहाल किया गया था। विभाग का मानना था कि पुल पब्लिक हित में किसी तरह से बन जाएं। परमानेंट ब्लैक लिस्टेड करने से काम नहीं हो पाता है।
सवाल- ऐसे पिलर और कहीं हैं?
जवाब- ऐसे पिलर के पुल कई जबह बनवाए गए हैं। कुछ स्थानों पर तो 60-60 मीटर में भी स्पॉन डाले गए हैं और पुल का रिजल्ट बढिय़ा हैं। लोड पूरा स्टिंग केबल पर आता है, गुणवत्ता की अनदेखी के कारण ऐसा हुआ।
सवाल- अब आगे क्या स्थिति रहेगी?
जवाब- जांच में जो आएगा उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसी स्लैब को तोड़कर फिर से नया पुल बनाया जाएगा। अभी इसी ठेकेदार से काम कराया जाएगा। काम सही न होने पर अन्य ठेकेदार को काम दिया जाएगा।

 

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ठेकेदार का आरोप, दबाव बनाकर कार्य कराया गया
वहीं ठेकेदार रामसज्जन शुक्ला का कहना है कि उसे कार्य करने के लिए विभाग द्वारा दबाव डाला गया था। मुझे वर्ष 2011 में वर्क ऑडर दिया गया। वर्ष 2013 में मुआवजा प्रकरण के निपटारे के बाद निर्माण के लिये साइड मिला था। वहीं फाउंडेशन व तीन पिलर के स्लैब की स्वीकृति के लिए बनायी ड्राइंग डिजाइन को मंजूर होने में ही दो वर्ष का समय लगा। विभाग द्वारा पहले 90 मीटर का स्लैब बनाने को कहा था चूंकि वह ना तो संभव था ना ही सुरक्षित इसलिए दुबारा डिजाइन दी गयी। वर्ष 2017 में समान्तर पुल के लिए एक और पिलर बनाने में एक करोड़ की राशि खर्च हुयी जिसमें उसे सिर्फ 25 लाख ही मिले। स्लैब की ढलाई पर एक करोड़़ की राशि मेरे द्वारा खर्च की गयी जिसमें से एक भी रुपये नही मिला। अगर मुझे निर्माण नही करना होता तो मैं अपना पैसा क्यों लगाता। मैं अभी भी निर्माण करने को तैयार हूं।