नगर निगम हायर सेकेंडरी स्कूल में कार्यशाला एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा, मौसमी बीमारियों से बचाव और कचरा प्रबंधन के प्रति बच्चों व शिक्षकों को जागरूक करना था।
मिट्टी की मूर्ति निर्माण कार्यशाला से बढ़ाया पर्यावरण प्रेम
कार्यक्रम के दौरान स्कूली छात्रों को मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उन्हें प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी हानिकारक मूर्तियों की जगह प्रकृति-अनुकूल विकल्प अपनाने की प्रेरणा मिली। लगभग 200 छात्र-छात्राओं ने इस प्रशिक्षण में भाग लिया और अपनी रचनात्मकता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
मच्छर जनित रोगों से बचाव पर जानकारी
कार्यक्रम में मौसमी बीमारियों, विशेष रूप से डेंगू, मलेरिया एवं चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों—से बचाव के उपायों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। जिला मलेरिया अधिकारी श्री करण सिंह भूरिया ने बच्चों को इन रोगों के लक्षण, कारण एवं रोकथाम के तरीके बताए।
स्वच्छता की शपथ, सिंगल यूज पॉलिथीन से दूरी का संकल्प
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे नगर निगम के उपायुक्त श्री सचिन सिटोले ने बच्चों को सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में बताया और इसके उपयोग से बचने की शपथ दिलाई। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि स्वच्छता सिर्फ निगम की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
3R सेंटर के महत्व पर संवाद
नगर निगम की आईईसी टीम द्वारा छात्रों को Reduce, Reuse, Recycle सिद्धांतों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि घरों से निकलने वाले कचरे का उचित प्रबंधन करके किस प्रकार पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है। 3R सेंटर की भूमिका और वहाँ मिलने वाली सुविधाओं से भी परिचित कराया गया।
स्वास्थ्य विभाग व निगम टीम की सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर मलेरिया विभाग से नीरज शरद (मलेरिया निरीक्षक), सुधीर हल्दी, राजेश बुरे, डालूराम चौहान, वीरेंद्र भंवर ( एवं देवदास प्रजापति मौजूद रहे। नगर निगम की ओर से झोन प्रभारी भुवन श्रीमाली तथा टीम के सदस्य उमा हिरवे, दीपमाला कटारे, दीपिका श्रीवास और रवि शर्मा ने कार्यक्रम के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सामाजिक सरोकारों की ओर एक प्रेरक कदम
इस आयोजन के माध्यम से नगर निगम खंडवा ने बच्चों में पर्यावरण के प्रति प्रेम, स्वास्थ्य के प्रति सजगता और स्वच्छता के प्रति जागरूकता का बीजारोपण किया। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से न सिर्फ स्कूल स्तर पर बल्कि समाज के हर वर्ग में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।