
कोटा. जानलेवा हमले के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी की सोमवार को केन्द्रीय कारागार कोटा में सोमवार सुबह संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के सकतपुरा निवासी निखिल सिंह राजावत उर्फ भवानी (25) जानलेवा हमले के मामले में वर्ष 2016 से आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा था। उसे बूंदी जेल से 4 अप्रेल 2016 को कोटा केन्द्रीय कारागार लाया गया था। जहां रविवार रात तक वह पूर्णतया स्वस्थ था।
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सोमवार सुबह उसकी तबीयत बिगडऩे व मुंह से झाग आने पर जेल से हेड कांस्टेबल देवीलाल उसे उपचार के लिए एमबीएस चिकित्सालय ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले में नयापुरा पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से मृतक का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया। इस मामले में न्यायिक जांच की जाएगी। घटना की जानकारी के पुलिस उप अधीक्षक भंवर सिंह हाड़ा, नयापुरा थानाधिकारी अंकित जैन, व मामले के जांच अधिकारी रमेशचंद मौके पर पहुंचे तथा परिजनों की समझाइश का आश्वासन दिया।
पिता ने जेल प्रशासन पर लगाया हत्या का आरोप –
घटना की सूचना लगने व परिजन व मित्र पोस्टमार्टम रूप पहुंचे। जहां मृतक के पिता दौलत सिंह राजावत ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जेल प्रशासन की ओर से उसके पुत्र की हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि जेल में उनके पुत्र निखिल ने मोबाइल से उनसे रविवार रात करीब साढ़े 11 बजे बात की थी। उस समय वह बिल्कुल ठीक था। इस दौरान उसने कहा कि आप मकान का बचा हुआ काम पूरा करवाओ। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पुत्र से जेल में जेल प्रशासन के अधिकारियों ने एक लाख रुपए की मांग की थी। उसके पुत्र को जेल में परेशान किया जा रहा था। जेलकर्मियों ने उसके पुत्र से पूर्व में मारपीट भी की थी।
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इससे उसके सिर में 7 टांके आए थे। जेल में परेशान होकर उसने भूख हड़ताल भी कर दी थी। इस पर उन्होंने जेल में अव्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन को करीब दो माह पूर्व ज्ञापन भी दिया था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसने पुत्र की राजस्थान हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगा रखी थी। ऐसे में उसकी जमानत होने और जेल की स्थिति सार्वजनिक होने से पहले ही जेल प्रशासन द्वारा उसकी हत्या करवा दी गई।
-जेल में निखिल नाम के बंदी की मौत हुई है। उसका मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाकर न्यायिक जांच करवाई जाएगी। मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम होने के बाद चल पाएगा। जेल प्रशासन पर लगाए गए आरोप गलत है।
-सुमन मालीवाल, जेल अधीक्षक, केन्द्रीय कारागार, कोटा