
नई दिल्ली। मुंबई में जारी छठे इंडो-यूएस विमानन शिखर सम्मेलन में केंद्रीय उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि आपसी हित के कई क्षेत्र हैं जिन मुद्दों पर हमें चर्चा करने की आवश्यकता है। खासतौर से यात्री विमान और ड्रोन बनाने की तकनीक को लेकर। उन्होंने कहा कि भारत को इस क्षेत्र में हर स्तर पर तकनीकी और अन्य सेवाओं की आवश्यकता है। यह एक ऐसा क्षेत्र हैं जहां अमरीका से भारत सीखने की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि भारत ने ड्रोन की तकनीक को लेकर पहले भी प्रस्ताव रखा था। अमरीकी सरकार को चाहिए कि वो इस तकनीक के हस्तांतरण और ड्रोन के निर्यात पर विचार करे।