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नागौर. शहर के प्रमुख मार्गों की हालत खराब है। स्थिति यह हो गई है कि लाखों का टैक्स अदा करने के बाद भी शहरवासियों को एक बेहतर सडक़ तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई जगहों पर सडक़ें इतनी ज्यादा खराब हैं कि उस पर सफर करना ही मुश्किल हो गया है। इनमें रिहायसी क्षेत्रों के साथ बाईपास तक की सडक़ें शामिल हैं। इंदिरा कॉलोनी, व्यास कॉलोनी, काजियों का चौक, बाड़ीकुआ, गिनाणी गली, नया दरवाजा क्षेत्र से मूण्डवा चौराहे तक नजर डालने पर सडक़ों की स्थिति खुद-ब-खुद नजर आ जाती है। कई जगहों पर सडक़ों पर न केवल गड्ढे मिले, बल्कि कुछ स्थानों पर यह दो हिस्सों में टूटी मिली। इसकी वजह से स्थिति अब ज्यादा खराब होने लगी है।
उखड़ी सडक़ दो हिस्सों में बंटी
शहर के इंदिरा कॉलोनी एवं व्यास कॉलोनी क्षेत्र से कृषि मंडी एवं सुगन सिंह सर्किल की ओर से जाने वाले रास्तों के सडक़ की हालत खराब है। व्यास कॅालोनी चौराहा से संत बलरामदास शास्त्री विद्यालय जाने वाले मार्ग पर कई जगह से सडक़ की गिट्टियां ही उखडकऱ बाहर आ चुकी हैं। यहां पर तीन जगह सडक़ दो अलग-अलग हिस्सों में बंटी नजर आई।
पूरी सडक़ ही उधड़ गई
शहर के बाड़ीकुआं क्षेत्र में सडक़ का आधा से ज्यादा हिस्सा पूरी तरह से उधड़ गया है। सडक़ की स्थिति देखकर ही लग रहा था कि लंबे समय से न तो इसकी मरम्मत की गई है, और न ही इसका निर्माण हुआ है। राह से गुजरते ऑटो वाहनों के साथ दोपहिया वाहन भी उछलते-चलते नजर आए।
गलती से गिरे तो फिर मुश्किल
गिनाणी गली की हालत तो इससे ज्यादा खराब मिली। यहां सडक़ मार्ग के बिलकुल बीच में एक हिस्से की पूरी सडक़ ही गायब नजर आई। यहां पर से गुजरते वाहनों की स्पीड खुद-ब-खुद धीमी होती रही। स्थानीय बाशिंदों की माने तो लंबे समय से इसकी मरम्मत नहीं किए जाने के कारण हालत अब और ज्यादा खराब होने लगी है।
डामर हुआ ही नहीं, केवल गिट्टियां
जेठा मार्केट क्षेत्र से गुजरने वाली मुख्य मार्ग की हालत बेहद खस्ता हो चुकी है। इस पूरी सडक़ पर केवल गिट्टियां ही बिछी नजर आई। स्थानीय बाशिंदों की माने तो इस पर से पैदल राहगीरों तक का गुजरना मुश्किल रहता है। कई बार चलते हुए बच्चे गिरे तो फिर चोटहिल भी हो गए। बताते हैं कि लंबे समय से यह स्थिति बनी हुई है।
काजियों का चौक सडक़ का एक हिस्सा ही गायब
काजियों का चौक क्षेत्र की मुख्य सडक़ का बिलकुल बीच के एक हिस्से से सडक़ ही पूरी तरह से गायब हो चुकी है। यानि की यहां पर हुए गड्ढों की वजह से सफर करना मुश्किल हो गया है, लेकिन इसको बनवाने की जहमत तक नहीं उठाई गई। स्थानीय बाशिंदों के मुताबिक कई बार इसकी वजह से वाहन सवार गिरते-गिरते बचे, जो गिरे तो चोटहिल हो गए।
नया दरवाजा रामदेव मंदिर
इस क्षेत्र की सडक़ भी बिलकुल बीच के हिस्से से टूटी नजर आई। तकरीबन पांच से सात मीटर के हिस्से में सडक़ का पूरा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है। बताते हैं कि कुछ समय पूर्व इसकी मरम्मत हुई थी, लेकिन घटिया गुणवत्ता की वजह से चंद दिनों में फिर से वही स्थिति हो गई। ऐसे दृश्य पूरी सडक़ पर कई जगह नजर आए।
जनता बोली……
बेहद शर्म की बात है कि शहर के सडक़ों की हालत इतनी खराब होने के बाद भी अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं मिलता है इस शहर में जहां पर सडक़ टूटी हुई हालत में न मिले।
रामप्रकाश आचार्य, शहरवासी
पूरे शहर में एक भी अच्छी सडक़ नजर नहीं आती है। विकास एवं जिम्मेदारी के नाम पर अधिकारियों की बेपरवाही का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ता है। आज सडक़ की स्थिति की वजह से चलते हुए भी डर लगता है।
प्रीती, शहरवासी
बिना हेलमेट चालाना होता है तो खराब सडक़ों की वजह से मुश्किल झेलते शहरवासियों की दिक्कतों में इजाफा करने वाले संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रिंस शर्मा, शहरवासी
वास्तव में यह एक बेहद अफसोसजनक स्थिति है कि विश्व पटल पर जहां देश का दबदबा बढ़ा है, वहीं सडक़ों की हालत के मामले में नागौर शहर शायद प्रदेश का इकलौता ऐसा शहर होगा। जहां पर एक भी सडक़ आपको बिना गड्ढा के नहीं मिलेगी।
दीपक दहिया, शहरवासी
इनका कहना है…
शहर के सडक़ों की स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।
सुनील कुमार, कार्यवाहक आयुक्त व उपखण्ड अधिकारी नागौर