नागौर. गोचर व अंगोर भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर ज्ञापन देने वाले साडोकन के हरकाराम व खुडख़ुड़ा कलां के प्रेमाराम मेघवाल की शिकायत जिला प्रशासन 12 सालों में भी दूर नहीं कर पाया है। दोनों परिवादी हर महीने तीसरे गुरुवार को होने वाली जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक व जिला स्तरीय जनसुनवाई में उपस्थित होकर दोनों गांवों में गोचर व अंगोर भूमि पर किए गए अतिक्रमण व अवैध खनन की शिकायत करते हैं, इसके बावजूद प्रशासन न तो अतिक्रमण हटवा पाया और न ही अवैध खनन रुकवा पा रहा है। ऐसा नहीं है कि दोनों परिवादी केवल शिकायत करते हैं, बल्कि दोनों अपने ज्ञापन के साथ राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर की ओर से दिए गए आदेश की प्रतियां भी लगाते हैं। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 4 मार्च 2011 को खुडखड़़ा कलां गांव में गोचर व अंगोर भूमि पर किए गए अतिक्रमण हटाने तथा 13 नवम्बर 2013 को साडोकन की चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। जिले भर से आए अन्य परिवादियों के साथ हरकाराम व प्रेमाराम ने भी गुरुवार को ज्ञापन के साथ हाईकोर्ट के आदेश की प्रति एवं पूर्व में प्रकाशित समाचारों की कटिंग की प्रतियां संभागीय आयुक्त महेशचंद शर्मा को सौंपी।
मां के साथ आया पांचाराम, न्याय की गुहार
मेड़ता तहसील के आकेली ए निवासी पांचाराम अपनी 80 वर्षीय मां सायरी देवी के साथ जनसुनवाई में आया। अधिकारियों को ज्ञापन देकर मां-बेटे ने बताया कि तहसीलदार व राजस्व कार्मिकों ने नियम विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उसका बाड़ा व खेत की मेड़तोड़ दी। इसकी पुष्टि जांच में भी हो चुकी है। अजमेर संभागीय आयुक्त ने कार्रवाई के दौरान जब्त सामग्री को वापस लौटाने के आदेश दिए, लेकिन उसकी पालना नहीं हुई। उन्होंने मांग की कि दोषी अधिकारी व कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई हो तथा उसे हुए नुकसान का हर्जाना दिलाया जाए।
रेलवे लाइन के लिए सरकारी जमीन लेने की मांग
इसी प्रकार मेड़ता क्षेत्र के सारंग बासनी के माधुराम, भीकाराम, अशोक, रामपाल, पुरखाराम, शंकराराम सहित अन्य ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपकर भारतीय रेलवे की ओर से किए गए सर्वे में पुरानी रेलवे लाइन उत्तर दिशा की काश्तकारी भूमि से निरस्त कर दक्षिण की सरकारी भूमि में करने की मांग की। उन्होंने कहा कि रेलवे की ओर से एक ही स्थान से बार-बार जमीन अधिग्रहण करने से किसान भूमिहीन हो जाएंगे।