नागौर. जिले के लोगों को हिमालय का मीठा पानी पिलाने के लिए नहरी प्रोजेक्ट के दो चरणों में 4 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने के बाद करीब छह साल पहले शुरू हुई जल जीवन मिशन (जेजेएम) योजना भी लोगों के कंठ तर नहीं कर पाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिछाई की गई पाइपलाइनों में दो से तीन साल बाद भी पानी नहीं आया है, वहीं कई गांवों में टंकियां बनकर तैयार हैं, लेकिन दो-दो साल बाद भी उनसे पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। 17 माह पहले सत्ता में आई भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर जल जीवन मिशन का बजट खर्च नहीं करने के आरोप लगाए थे। खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नागौर में जेजेएम का बजट खर्च नहीं करने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद 14 महीने बीतने के बावजूद स्थिति जस की तस है।
पहले नहरी प्रोजेक्टर के प्रथम व द्वितीय चरण में 4 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन गांवों में जब पानी नहीं पहुंच पाया तो केन्द्र सरकार ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) शुरू कर दिया, जिसे 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री ने खुद लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य वर्ष 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को ‘कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन’(एफएचटीसी) प्रदान करना था, लेकिन नागौर जिले में आज भी लोगों को टेंकरों से पानी डलवाना पड़ रहा है।
रात को ही लग जाते हैं लाइन में
गोगेलाव डेम पर भरे जा रहे पानी के टेंकरों की लाइन देखकर हर कोई अंदाजा लगा सकता है कि जिले में पेयजल किल्लत किस कदर है। टेंकर चालकों ने बताया कि तीन-चार घंटे खड़े रहने पर नम्बर आता है। टेंकर चालक रात को ही लाइन में लग जाते हैं, ताकि सुबह होने पर उनका टेंकर भर सके। यहां एक-एक किलोमीटर लम्बी कतार लगती है।
शहर की ऐसी कॉलोनी, जहां पानी नहीं बिल आता है
बालसागर निवासी हरिराम वैष्णव ने बताया कि जब से पाइपलाइन बिछाई है, तब से पानी नहीं आ रहा है, लेकिन बिल समय-समय पर आ रहा है। बालसागर, गणेश कॉलोनी की राजूदेवी ने बताया कि पाइपलाइन बिछाकर कनेक्शन जारी कर दिए, लेकिन दस सालों से पानी नहीं आया। बिल जरूर आते हैं। इसको लेकर जयपुर तक शिकायत कर दी, लेकिन कोई परवाह नहीं करता। एक हजार रुपए में टेंकर डलवाते हैं। इसी प्रकार जेता देवी ने बताया कि जब से कॉलोनी बसी है, तब से पानी नहीं आता, जबकि जब भूखंड खरीदा, तब बेचने वाले ने कहा कि पानी की लाइनें बिछी हुई है और पानी आएगा। हां, बिल जरूर आते हैं, जो हम लगातार भर रहे हैं। यही हाल शहर के बाहरी इलाकों में बसी कॉलोनियों की है। पार्षद गोविन्दकड़वा ने बताया कि वार्ड संख्या एक की कई कॉलोनियों में सुचारू पानी की सप्लाई नहीं होती, जिससे लोगों को महंगे दामों पर टेंकर डलवाने पड़ते हैं।
इस बार अब तक नहरबंदी भी नहीं
जलदाय विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आमतौर पर एक महीने आंशिक व एक महीने पूर्ण नहरबंदी होती है, जिसका नोटिफिकेशन जारी हो जाता है, लेकिन इस बार नहरबंदी को लेकर अब तक कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। नागौर को प्रतिदिन करीब 21 एमएलडी पानी दिया जा रहा है। शहर में करीब 24 हजार वैध जल कनेक्शन हैं।
इस बार खूब काटे अवैध कनेक्शन
इस बार शहर में पानी की जलापूर्ति सुचारू रखने के लिए पिछले काफी समय से अवैध कनेक्शन काटे जा रहे हैं। मार्च तक शहर में 2032 अवैध कनेक्शन काटे गए, जबकि 1.80 लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया। अप्रेल माह में अब तक 130 अवैध जल कनेक्शन काटे हैं तथा 36 हजार का जुर्माना वसूला है। तीन जनों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई है। हरसंभव प्रयास कर रहे हैं कि शहर में नियमित जलापूर्ति हो, फिर भी गर्मी का समय है, इसलिए लोगों की डिमांड बढ़ जाती है।
– रमेशचंद्र चौधरी, अधिशासी अभियंता, जलदाय विभाग, नागौर