नागौर. प्रोटीन को शरीर के लिए बेहद जरूरी माना गया है और दालों को प्रोटीन का भंडार माना जाता है। नागौर जिला दलहन के उत्पादन में राजस्थान का अग्रणी जिला है। खासकर मूंग उत्पादन में नागौर प्रदेश में पहले स्थान पर है। नागौर में उगाए जाने वाले मूंग की गुणवत्ता का कोई सानी नहीं है। यहां के मूंग से तैयार होने वाली दाल का स्वाद और रंग सबसे अलग है, यही कारण है कि नागौरी मूंग की मांग देश के साथ विदेशों में भी है। दाल व्यवसायियों का कहना है कि जो भी कम्पनियां दाल के प्रोडक्ट निर्यात करती है, उनकी प्राथमिकता में नागौरी मूंग ही है। मूंग के अलावा नागौर जिले में दलहन में मोठ व चने की खेती भी की जाती है। दालों में मौजूद पोषण और इसके फायदों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 10 फरवरी को अंतराष्ट्रीय दलहन दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
नागौर में दलहन फसलों की बुआई का औसत क्षेत्रफल व उत्पादन
मूंग : क्षेत्रफल – 6,44,886 हैक्टेयर
उत्पादन – 3,99,494 मीट्रिक टन
मोठ : क्षेत्रफल – 44,864 हैक्टेयर
उत्पादन – 21,671 मीट्रिक टन
चना : क्षेत्रफल – 61,715
उत्पादन – 74,867
नागौर के मूंग का रंग और स्वाद विशेष
राजस्थान में मूंग उत्पादन में नागौर सबसे अग्रणी जिला है। यहां के मूंग की दाल रंग और स्वाद में सबसे अलग है। इसमें कीड़े नहीं लगते और अन्य जिलों में उगाए जाने वाले मूंग की बजाए नागौर के मूंग का वजन भी ज्यादा होता है। नागौर के मूंग की दाल की मांग देश के साथ विश्वभर में भी है। इसलिए बड़ी मात्रा में उत्पादन के बावजूद मांग पूरी नहीं होती। यहां के मूंग की खासियत यह है कि देश की ज्यादातर कम्पनियां जो अपने प्रोडक्ट को एक्सपोर्ट करती हैं, वो यहां से दाल खरीदती है। नागौर शहर में वर्तमान में 22 दाल मिलें हैं और जिले भर में करीब 10 दाल मिलें अन्य स्थानों पर संचालित हो रही हैं। इस क्षेत्र में बढ़ते स्कोप को देखते हुए यहां और मिलें भी लगने की संभावना है। किसानों से कहना चाहुंगा कि वे बड़े दाने के मूंग का उत्पादन करे और पेस्टीसाइड का उपयोग कम करें। देसी खाद का उपयोग करें, ताकि अच्छे भाव मिल सके।
– भोजराज सारस्वत, प्रांतीय उपाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती
कई रोगों से बचाती हैं दालें
दालों से बने खाद्य पदार्थ प्रोटीन, फाइबर, फोलेट जैसे विटामिन और आयरन और पोटेशियम जैसे खनिजों के समृद्ध स्रोत हैं। इनमें वसा और सोडियम कम होता है और ये स्वाभाविक रूप से ग्लूटेन और कोलेस्ट्रॉल मुक्त होते हैं। दालों के नियमित सेवन से हृदय रोग, मधुमेह और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा कम हो सकता है।
– डॉ. राजदीप मुंदियाड़ा, कृषि वैज्ञानिक, कृषि अनुसंधान उप केन्द्र, नागौर