
इंदौर। हर साल खरबों तस्वीरें खींची जाती हैं और लोग भूल जाते हैं। दोस्तों की गैलरी में छिपी ये यादें अक्सर उन लोगों तक वापस नहीं पहुंचतीं, जिनकी वे तस्वीरें हैं। अगर ऐसी अनदेखी तस्वीरें भी मिल जाए तो फिर क्या कहना। अब यह संभव हो सकेगा एआइ की मदद से। एआइ संचालित म्यूचुअल फोटो शेयरिंग एप भी लांच हो चुका है। पिकसी के अनोखे ‘देकरपाओ’ फोटो एक्सचेंज मॉडल के ज़रिएयूज़र्स को उनकी खुद की अनदेखी तस्वीरें तुरंत मिल जाती हैं, जो उनके दोस्तों ने कभी खींची थीं। बिलियन हार्ट्स सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज़ के मयंक बिदावतका ने इसे लांच किया है।
फोटो शेयरिंग का तरीका बदल देगा
मयंक बिदावतका, संस्थापक, पिकसी ने कहा दुनिया में 15 ट्रिलियन से ज़्यादा तस्वीरें हैं, और हर साल 2 ट्रिलियन नई क्लिक होती हैं, फिर भी इनका बड़ा हिस्सा कभी शेयर नहीं होता। लोग भूल जाते हैं या फिर उन्हें कोई वजह नहीं दिखती, क्योंकि उन्हें कुछ वापस नहीं मिलता। पिकसी दुनिया का पहला म्यूचुअल फोटो शेयरिंग ऐप है, जिससे आप अपने दोस्तों से हजारों तस्वीरें पा सकते हैं, वह भी बिल्कुल सुरक्षित रूप से और बिना बार-बार याद दिलाए। व्हॉट्सऐप या पारंपरिक ऐप्स के विपरीत, इसमें आपको फोटो या लोगों को मैन्युअली चुनने की ज़रूरत नहीं है। पिकसी खुद-ब-खुद आपके दोस्तों को पहचानता है और शेयर करने के लिए फोटो तैयार करता है। यूज़र्स को 24 घंटे की रिव्यू विंडो भी मिलती है।
पिकसी ऐसे काम करेगा
पिकसी अपनी विशेष फेशियल रिकग्निशन तकनीक से यूज़र की गैलरी स्कैन करता है, दोस्तों को पहचानता है और एक पर्सनलाइज्ड इनवाइट भेजता है। जैसे कि मेरे पास तुम्हारी 75 तस्वीरें हैं। उन्हें पिकसी पर आकर लो। जब दोस्त इनवाइट स्वीकार करते हैं, तो वे अपने फोन से उन तस्वीरों को शेयर करते हैं, जो उन्होंने पहले ली थीं। इस तरह एक स्मार्ट, सुरक्षित और म्यूचुअल एक्सचेंज बनता है। दोनों को 24 घंटे की समीक्षा अवधि मिलती है, जिसमें वे कोई भी तस्वीर शेयर होने से पहले हटा सकते हैं।
प्राइवेसी-फर्स्ट ऐप
पिकसीऐप कभी-भी तस्वीरों को अपने सर्वर पर सेव नहीं करता। सभी फोटोज़यूज़र के डिवाइस पर ही रहती हैं और ट्रांसफर के दौरान एन्क्रिप्टेड होती हैं, ताकि कोई भी, यहां तक कि पिकसी के कर्मचारी भी उन्हें देख न सकें।