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VIDEO : आखिर एेसा क्या है इस अस्पताल में जो नहीं आते मरीज, जानिए पूरी खबर
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VIDEO : आखिर एेसा क्या है इस अस्पताल में जो नहीं आते मरीज, जानिए पूरी खबर

-पाली शहर के मंडिया रोड स्थित इएसआइ अस्पताल का मामला-शिशु रोग, स्त्री रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग सहित कई चिकित्सकों के पद रिक्त
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पाली

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Suresh Hemnani

Oct 05, 2018

ओम टेलर
पाली। शहर के मंडिया रोड पर करोड़ों की लागत से बना इएसआई अस्पताल वर्तमान में अपनी दशा पर आंसू बहा रहा है। शहर की फैक्ट्रियों, मिल सहित कई बड़ी फर्मों में कार्यरत कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने वाला ये अस्पताल वर्तमान में दो चिकित्सकों के भरोसे चल रहा है। अस्पताल में हड्डी रोग, महिला रोग, शिशु रोग सहित कई चिकित्सकों के पद लम्बे समय से रिक्त है। 2.60 करोड़ की लागत से बने 50 बेड की क्षमता के इस अस्पताल का उद्घाटन 27 दिस बर 2000 को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया था।

इएसआइ अस्पताल में चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ सहित अन्य पदों के लिए 37 पद स्वीकृत है। लेकिन वर्तमान में 17 कार्मिक ही कार्यरत है। 20 पद ल बे समय से रिक्त है। चिकित्सकों के 17 पद स्वीकृत है, लेकिन वर्तमान में तीन चिकित्सक कार्यरत है। शिशु रोग, स्त्री रोग, हड्डी रोग, इएनटी विशेषज्ञ सहित कई चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े है। ऐसे में चिकित्सक यहां से मरीजों को रेफर करने में ही अपनी भलाई समझते है। यहां कार्यरत तीन चिकित्सकों में से एक सर्जन है तो एक अन्य चिकित्सक को अन्य डिस्पेंसरी में लगा रखा है।

टेक्नीशियन के छुट्टी पर जाते ही लैब बंद
अस्पताल में लैब बनी हुई है जहां, ब्लड, शुगर, हिमोग्लोबिन सहित कई जांचे होती है। लेकिन लैब टेक्नीशियन एक ही कार्यरत है। ऐसे में उनके छुट्टी पर जाने पर मरीजों की जांचे नहीं हो पाती है। सीधे शब्दों में कहे तो उनके छुट्टी पर जाते ही लैब पर ताला लग जाता है।

अस्पताल की शोभा बढ़ा रही एम्बुलेंस
गंभीर मरीजों को इएसआई डिस्पेंसरी से मंडिया रोड मुख्य अस्पताल तक लाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने ठेके पर एम्बुलेंस लगा रखी है। लेकिन मरीजों का टोटा होने के कारण एम्बुलेंस अस्पताल की सिर्फ शोभा ही बढ़ा रही है। फिर भी अस्पताल प्रबंधन इस पर प्रतिमाह 18 हजार रुपए खर्च कर रहा है।

अस्पताल को बनाया पार्किंग स्थल
मरीजों के अभाव में अस्पताल लगभग सूना ही पड़ा रहता है। ऐसे में यहा कार्यरत स्टाफ में से अधिकतर अपने वाहन अस्पताल परिसर की अपेक्षा अस्पताल के भीतरी भाग में रखना अपनी शान समझते है। यह स्थिति लम्बे समय से है लेकिन इन्हें निर्धारित स्थान पर वाहन रखने एवं अस्पताल के भीतरी भाग को गंदा करने से रोकने वाला कोई नहीं है।

बेड 50, पर खाली पड़े वार्ड
बेड की क्षमता का अस्पताल है लेकिन आवश्यक सुविधाएं नहीं होने से यहां भर्ती होने वाले मरीजों की सं या काफी कम है। ऐसे में वार्ड खाली ही पड़ा रहता है। ाास बात ये है कि अस्पताल में कार्यरत स्टाफ के वेतन, रख-रखाव सहित अन्य कार्यों के लिए अस्पताल का प्रतिमाह का खर्च 16-17 लाख रुपए है। इधर, अस्तपाल में प्रतिदिन 25 से 27 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे है लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव के चलते अधिकतर को यहां से रेफर किया
जा रहा है। अस्पताल के रेकर्ड के अनुसार 17 सित बर से दो अक्टूबर तक अस्पताल में 444 मरीज उपचार के लिए पहुंचे।

पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
चिकित्सक 17 02 15
नर्सिंग स्टाफ 11 11 00
लैब टेक्नीशियन 04 01 03
लिपिक 03 02 01
च. श्रे. कर्मचारी 02 01 01

चिकित्सकों की कमी से नहीं आते मरीज
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी ल बे समय से है। ऐसे में मरीजों के आने की संख्या कम है। वैसे गंभीर बीमारी से पीडि़त मरीजों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों से टाइअप कर रखा है। आवश्यक होने पर मरीजों का वहां रेफर करते है। – जी.एल. जैन, वरिष्ठ चिकित्सक, इएसआइ अस्पताल, पाली