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सरस्वती की तरह लुप्त हो जाएगी राजस्थान में घग्घर नदी

Our Ghaggar river will disappear like Saraswati- श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिलों की 65 हजार एकड़ भूमि पर खतरा

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श्रीगंगानगर. सरस्वती की तरह घग्घर नदी भी प्रदेश की विलुप्त नदी बन जाएगी। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सरकारों के बीच हुए एक समझौते के बाद यह आशंका व्यक्त की गई है। इस समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश में एक बांध बनाया जाएगा, जिसमें संग्रहित होने वाले पानी का उपयोग केवल हरियाणा और हिमाचल ही कर सकेंगे। अभी जो पानी घग्घर के नदी माध्यम से हरियाणा होते हुए राजस्थान में प्रवेश कर श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिलों की हजारों एकड़ भूमि को सिंचित करता है, उस पर हिमाचल और हरियाणा का नियंत्रण हो जाएगा और इन दोनों जिलों को एक बूंद भी पानी नहीं मिलेगा। घग्घर का पानी राजस्थान में भी आता है, लेकिन समझौता करते समय दोनों राज्यों ने राजस्थान की राय तक नहीं ली।

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शिवालिक की पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती घग्घर नदी हिमाचल, पंजाब और हरियाणा होते हुए राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में प्रवेश करती है और श्रीगंगानगर जिले में बहती हुई भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार कर पाकिस्तान में प्रवेश कर जाती है। हिमाचल में बांध बनने के बाद घग्घर का पानी नियंत्रित हो जाएगा। हरियाणा अपने हिस्से का पानी लेगा तो उसे रोकने के लिए उसने 2002-03 में ही राजस्थान के विरोध के बावजूद ओटू बांध बना कई नहरें निकाल ली। यह बांध बनने से पहले राजस्थान को बरसाती सीजन में घग्घर से 0.6 एमएएफ पानी मिलता था, वहीं बांध बनने के बाद 0.3 एमएएफ पानी ही मिल पाता है।
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घग्घर नदी के कुछ तथ्य
1955 से पहले घग्घर में बाढ़ का पानी कम समय के लिए मामूली मात्रा में आता था।
1958 के बाद पानी की मात्रा एवं अवधि बढ़ती गई।
1962 में घग्घर का पानी पहली बार अनूपगढ़ के निकट भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा तक गया।
1964 में पानी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान में गया।
2002-03 में हरियाणा के ओटू बांध बनाने से घग्घर में पानी की आवक लगातार कम।
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राजस्थान की उदासीनता
घग्घर और इसके पानी को लेकर राजस्थान सरकार हमेशा उदासीन रही है। हरियाणा 2002-03 में जब ओटू बांध का निर्माण कर रहा था, तब श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिलों ने भारी विरोध किया। किसानों ने ओटू बांध तक विरोध मार्च भी निकाला। राज्य सरकार ने तब आपत्ति दर्ज करवा अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। वर्ष 2003 में केन्द्रीय जल आयोग की बैठक में राजस्थान, पंजाब व हरियाणा के बीच घग्घर के पानी के बंटवारे का मामला राजस्थान में उठाया। लेकिन बाद में सही तरीके से पैरवी नहीं करने के कारण यह मामला फाइलों में दब गया।
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बांध बनने के बाद स्थिति
बांध बनने के बाद राजस्थान के श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिलों को पानी मिलने की उम्मीद खत्म हो जाएगी। घग्घर के पानी से हरियाणा का इलाका सरसब्ज होगा, वहीं राजस्थान के इन दोनों जिलों की सर्वाधिक उपजाऊ मानी गई 65 हजार एकड़ भूमि के बंजर होने का खतरा है। नाली बेड के नाम से मशहूर इस भूमि पर चावल पैदा होने के कारण इसे राइस बेल्ट भी कहा जाता है। किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता सुभाष सहगल कहते हैं- नाली बेड का पानी घग्घर के कारण मीठा है। पानी नहीं मिलेगा तो यह खारा हो जाएगा। ट्यूबवैल से सिंचाई करने वाले नाली बेड के किसानों के सामने तब खेती बचाने का संकट खड़ा हो जाएगा।
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नदी का अस्तित्व होगा समाप्त
हिमाचल में बांध पर समझौता होने के साथ ही हरियाणा ने ओटू बांध की जलग्रहण क्षमता बढ़ाने के लिए इसका पुनर्निर्माण शुरू कर दिया है। सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के नाम पर हिमाचल में बनाए जा रहे बांध से राजस्थान में घग्घर का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। – कुलदीप बिश्नोई, मुख्य अभियंता (सेवानिवृत्त) जल संसाधन विभाग, राजस्थान।

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