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ग्राउंड रिपोर्ट : विदिशा-शमशाबाद विधानसभा सीटों पर क्या है जनता का मन !

सड़कें और पुल खूब बने, मेडिकल कॉलेज आया, फिर भी असंतोष का आलम

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विदिशा. बेतवा, पर्यटन स्थल और अनाज मंडी को अपने में समेटे विदिशा विधानसभा क्षेत्र में ज्यादातर किसान नहरों से वंचित हैं। कुछ जगह हलाली बांध की नहरों से सिंचाई होती है। लेकिन, वह अपर्याप्त है। सड़कें और पुल खूब बने हैं। लेकिन, सड़कों की गुणवत्ता से लोग खुश नहीं। मेडिकल कॉलेज बन गया। एमआरआइ जैसी व्यवस्था नहीं होने से लोग संतुष्ट नहीं हैं। मकोड़िया बांध की मांग पूरी न होने की नाराजगी है। बेतवा की ओर कभी शासन-प्रशासन का ध्यान नहीं गया। अतिक्रमण बढ़ रहा है। अनाज मंडी अच्छी है। किसान बिजली, पानी, खाद, बीज और फसल बीमा को लेकर कसमसाते रहते हैं। भैंरोखेड़ी में लोगों ने यही हालात बयां किए।

सबसे बड़ा मुद्दा मकोड़िया बांध
खलिहान में किसानों के बीच संजय राठी बोले, सबसे बड़ा मुद्दा मकोड़िया बांध का है। मांग काफी पुरानी है। लेकिन, पूरी नहीं हो रही। योजनाओं का लाभ अपात्रों को भी खूब मिल रहा है। खेमचंद, सूरजसिंह और खिलान सिंह बोले कि योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

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किसान बाहुल्य क्षेत्र में पानी-बिजली की कमी
महेंद्र सिंह दांगी का कहना था, क्षेत्र किसान बाहुल्य है। इसके बावजूद बिजली-पानी की जरूरत की पूर्ति नहीं है। विदिशा शहर में प्रीतेश अग्रवाल कहते हैं, मेडिकल कॉलेज बड़ी सुविधा है। लेकिन, उसमें एमआरआइ की व्यवस्था नहीं है। अतुल शाह बोले, वर्षों से बेतवा के शुद्धिकरण-संरक्षण की सिर्फ बात ही हो रही है। पूर्व शिक्षक विजय चतुर्वेदी बोले, शहर अतिक्रमण से कसमसा रहा है। अक्षय शर्मा पर्यटन स्थलों की अनदेखी से व्यथित हैं।

भ्रष्टाचार का बोलबाला
विदिशा के बाद हम शमशाबाद विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे तो पाया कि यह मूल रूप से किसानों का ही क्षेत्र है और किसान ही यहां सर्वाधिक परेशान हैं। शासन की तमाम योजनाओं के बावजूद यहां के ज्यादातर लोग नहरों से पानी न मिलने, सोसायटी से खाद-बीज न मिलने, भ्रष्टाचार के बोलबाले और अवैध शराब के धंधे से परेशान हैं।

जिनका पेटभरा है उन्हें ही मिल रहा योजनाओं का लाभ
शमशाबाद विधानसभा क्षेत्र के सबसे बड़े तहसील मुख्यालय नटेरन में पेड़ की छांव में बैठे खुमानसिंह, विजय सिंह, ब्रजेंद्र रघुवंशी, अमित शर्मा, रामबाबू प्रजापति, अनंत सिंह, पूरनसिंह, लखनसिंह, खिलान सिंह आदि ने क्षेत्र की व्यवस्थाओं के बारे में बात रखी। अमित की पीड़ा है कि योजनाओं का लाभ भरे पेट वालों को मिलता है। जिनके पास ट्रैक्टर हैं, लाभ भी उन्हें मिलेगा। गोशालाएं बन गईं। लेकिन, मवेशी नहीं रखे जा रहे। रामबाबू ने कहा, बिना पैसों के यहां कोई काम नहीं होता। बृजेंद्र कहते हैं, गांव-गांव अवैध शराब बिक रही है। नहरें हैं। लेकिन, किसानों को पानी नहीं मिलता। आदिवासी बस्तियों में आज भी बिजली नहीं है। खुमान भी कहते हैं कि लाइट नहीं मिल रही है। पूरन कहते हैं योजनाएं अच्छी हैं। लेकिन, चंद लोगों को ही लाभ मिल पाता है।

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