
विदिशा सीट 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में भेलसा सीट के नाम से थी। यहां पहले चुनाव से लेकर अब तक चुने गए विधायकों में से दो को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का मौका मिला है। एक हैं कांग्रेस के तख्तमल जैन जो मध्यभारत के मुख्यमंत्री बने और दूसरे भाजपा के शिवराज सिंह चौहान जो मप्र के मुख्यमंत्री हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में विदिशा का इतिहास बदल गया। यहां से लगातार भाजपा के विधायक बनते रहे हैं, लेकिन 2018 में पूरे 46 साल बाद यह सीट कांग्रेस ने भाजपा से छीन ली। अब यहां से कांग्रेस के शशांक भार्गव विधायक हैं।
भाजपा की अब तक की जारी उम्मीदवारों की सूची में विदिशा सीट की घोषणा नहीं हुई है, जबकि माना जा रहा है कि कांग्रेस से मौजूदा विधायक भार्गव का नाम लगभग तय है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक दलों में इस सीट को कब्जाने की पूरी कोशिश होगी। भाजपा इस सीट को फिर से कांग्रेस से छीनकर अपनी हार का बदला लेना चाहेगी, वहीं कांग्रेस 46 साल बाद अपनी झोली में आई सीट को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहेगी।
छह बार दांगी प्रत्याशी जीते
क्षेत्र दांगी बाहुल्य है। इस समाज के लोग राजनीति में भी आगे हैं और संपन्न भी हैं। यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इस क्षेत्र से दांगी प्रत्याशियों को उम्मीदवार बनाया, लेकिन ज्यादातर भाजपा के दांगी उम्मीदवार ही जीते। कांग्रेस का कोई दांगी उम्मीदवार अब तक यहां से जीत नहीं सका। भाजपा के ठाकुर मोहर सिंह यहां से 1980 से 1993 तक लगातार चार बार विधायक बने। अगले चुनाव में उनकी पत्नी सुशीला ठाकुर को और फिर 2014 में उनके भाई कल्याण सिंह को यहां से भाजपा उम्मीदवार बनने और जीतने का मौका मिला। कांग्रेस भी यहां से दांगी समाज के रणधीर सिंह दांगी और नारायण सिंह दांगी को अपना प्रत्याशी बना चुकी है।
पहले चुने जाते थे दो विधायक
विदिशा सीट से शुरुआती दो विधानसभा चुनाव में दो-दो विधायक चुने जाते रहे हैं। एक विधायक सामान्य वर्ग से और दूसरे विधायक अनुसूचित जाति वर्ग से चुने जाते रहे हैं। यह क्रम 1952 और 1957 के चुनाव तक जारी रहा। अगले 1962 में विदिशा सीट अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई। हालांकि अगले ही चुनाव में यह सीट सामान्य घोषित कर दी गई।
अब तक यहां कौन कब रहा विधायक
1952- जमनाप्रसाद मुखरैया हिन्दू महासभा(सामान्य)
1952- चतुर्भुज जाटव हिन्दू महासभा(अनुसूचित वर्ग)
1955- उपचुनाव-बाबू तख्तमल जैन कांग्रेस(सामान्य)
1955- उपचुनाव-हीरालाल पिप्पल कांग्रेस (अनूसूचित वर्ग)
1957- अजय सिंह रघुवंशी कांग्रेस(सामान्य)
1957- हीरालाल पिप्पल कांग्रेस (अनुसूचित वर्ग)
1962- हीरालाल पिप्पल कांग्रेस
1967- शंभूसिंह राजपूत जनसंघ
1970- उपचुनाव- राघवजी जनसंघ
1972- डॉ सूर्यप्रकाश सक्सेना कांग्रेस
1977- नरसिंह दास गोयल-जनता पार्टी
1980- ठाकुर मोहर सिंह- भाजपा
1985- ठाकुर मोहर सिंह-भाजपा
1990- ठाकुर मोहर सिंह-भाजप
1993- ठाकुर मोहर सिंह-भाजपा
1998- सुशीला ठाकुर-भाजपा
2003- सरदार गुरुचरण सिंह-भाजपा
2008- राघवजी- भाजपा
2013- शिवराज सिंह चौहान-भाजपा
2014- ठाकुर कल्याण सिंह-भाजपा
2018- शशांक भार्गव- कांग्रेस
Updated on:
13 Oct 2023 01:45 pm
Published on:
13 Oct 2023 01:42 pm
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