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mp election 2023: कांग्रेस ने विदिशा चुनाव में पुराने चेहरों पर खेला नया दांव

विदिशा में कांग्रेस ने खेला लगाया पुराने चेहरों पर नया दांव, विदिशा से शशांक भार्गव, बासौदा से निशंक जैन और शमशाबाद से सिंधु विक्रम सिंह उम्मीदवार

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नवरात्र के पहले दिन कांग्रेस ने जिले की पांच में से तीन विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर अटकलों पर विराम लगा दिया। तीनों ही सीटों से नाम पहले से संभावित चेहरों के ही हैं और कांग्रेस ने एक बार फिर अपने पुराने चेहरों पर ही नए चुनाव का दांव खेला है। कांग्रेस ने विदिशा से मौजूदा विधायक शशांक भार्गव, गंजबासौदा से पूर्व विधायक और पिछले चुनाव में भी प्रत्याशी रहे निशंक जैन तथा शमशाबाद से 2008 में कांग्रेस प्रत्याशी रहे सिंधु विक्रम सिंह के नाम घोषित किए हैं। वहीं भाजपा ने अब तक जिले की सिर्फ सिरोंज सीट से उमाकांत शर्मा का नाम घोषित किया है जो मौजूदा विधायक भी हैं। बाकी चार सीटें भाजपा ने होल्ड पर रखी हैं, जबकि कांग्रेस ने कुरवाई, सिरोंज सीटों को होल्ड पर रखा है। दो-चार दिन में पूरे जिले की तस्वीर साफ हो जाएगी।

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विदिशा विधानसभा से पांचवीं बार शशांक को टिकट

कांग्रेस ने शशांक भार्गव को लगातार पांचवीं बार विदिशा से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। सबसे पहले भार्गव 2008 में विदिशा से कांग्रेस प्रत्याशी बने थे, जिन्हें भाजपा के राघवजी ने पराजित किया था। अगले चुनाव 2013 में भाजपा प्रत्याशी शिवराज सिंह चौहान ने भार्गव को हराया। इसके बाद शिवराज सिंह ने विदिशा सीट छोड़ी और यहां 2014 में उपचुनाव हुआ। उपचुनाव उसमें लगातार तीसरी बार शशांक भार्गव कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उतरे, लेकिन भाजपा के कल्याण सिंह के हाथों पराजित हुए। इसके बाद 2018 में कांग्रेस ने चौथी बार भी भार्गव पर ही दांव खेला और भाजपा के मुकेश टंडन के सामने उतारा। इस बार भार्गव ने विदिशा में भाजपा का तिलस्म तोड़ते हुए चार दशक बाद कांग्रेस को जीत दिलाई।

यही कारण है कि 2023 के चुनाव में भी कांग्रेस ने भार्गव पर ही भरोसा कर उन्हें प्रत्याशी घोषित किया है। वैसे यह तय भी माना जा रहा था कि जब तीन बार लगातार हारने के बावजूद चौथी बार भी कांग्रेस ने शशांक भार्गव को प्रत्याशी बनाया था, तो इस बार विधायक के पद पर रहते हुए उनका टिकट कटना संभव नहीं। हालांकि इस सीट पर भाजपा अब तक प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है। पहले विदिशा से सीएम शिवराज सिंह चौहान का नाम चर्चा में आया था, लेकिन उनका नाम बुदनी से घोषित होने के बाद विदिशा का मामला और उलझ गया है। यहां से मुकेश टंडन, श्यामसुंदर शर्मा, तोरणसिंह दांगी, मनोज कटारे, मंजरी जैन, अरविंद श्रीवास्तव जैसे नामों की चर्चा है।

यह भी संभावना है कि ऐनवक्त पर कोई नया नाम घोषित कर भाजपा चाका सकती है। यह तय है कि 46 साल तक अपने कब्जे में रही विदिशा सीट को 2018 में हारने के बाद भाजपा इस सीट पर बहुत एहतियात बरत रही है और कोई भी रिस्क वह नहीं उठाएगी। इस सीट से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रतिष्ठा भी जुड़ी होने के कारण यहां के नाम पर गंभीरता से विचार होगा। हालांकि इस बार टिकट के विवाद को टालना काफी मुश्किल भरा लग रहा है।

गंजबासौदा निशंक पर फिर भरोसा

कांग्रेस ने अपनी जारी सूची में गंजबासौदा सीट से फिर निशंक जैन का नाम घोषित किया है। वे यहां से तीसरी बार उम्मीदवार बनाए गए हैं। 2013 में वे गंजबासौदा विधायक रहे, फिर 2018 में भाजपा की लीना जैन से पराजित हुए। तीसरी बार उन्हें फिर टिकट मिला है। कमलनाथ के करीबी माने जाने वाले निशंक का नाम भी पहले से ही तय माना जा रहा था। 2018 का चुनाव हार जाने के बाद भी वे कांग्रेस जिलाध्यक्ष रहे हैं । वे चुनाव हारने के बाद भी क्षेत्र में सक्रिय रहे। हालांकि यहां से कांग्रेस टिकट की दौड़ में प्रहलाद सिंह रघुवंशी का नाम भी मजबूती से लिया जा रहा था। वहीं भाजप इस सीट पर टिकट को लेकर असमंजस में है। मौजूदा विधायक लीना जैन, पूर्व विधायक हरिसिंह रघुवंशी, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जादौन, राजेश माथुर और विहिप के दायित्व से मुक्त होकर भाजपा में आए राजेश तिवारी के नाम दावेदारों में शुमार हैं।

शमशाबाद: जिला पंचायत ने खोले रास्ते सिंधु विक्रम के रास्ते

शमशाबाद विधानसभा में कांग्रेस 1985 से जीत को तरस रही है। यहां डॉ मेहताब सिंह यादव के बाद से कोई कांग्रेस का विधायक नहीं बन पाया। इस बार कांग्रेस के प्रत्याशी बनाए गए सिंधु विक्रम सिंह भी 2008 में कांग्रेस के टिकट पर ही यहां से चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत नहीं सके थे। इसके बाद काफी बदलावा आया और हाल ही के जिला पंचायत चुनाव में उनकी पत्नी रैना देवी और छोटे भाई चैतन्य विक्रम सिंह ने दो वार्डों से जीत हासिल की। बस, यहीं से सिंधु विक्रम सिंह के टिकट की भूमिका तय हो गई थी। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी सिंधु विक्रम सिंह ने अपनी पत्नी रैना देवी की उम्मीदवारी की पूरी तैयारी होने के बाद भी चुनाव से हट जानना बेहतर समझा। नतीजा यह हुआ कि वे अब विधानसभा प्रत्याशी बनाए गए हैं। यहां से भाजपा प्रत्यशी के नाम की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा विधायक राजश्री सिंह, पूर्व मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा और पूर्व वित्तमंत्री राघवजी की पुत्री ज्योति शाह के नाम यहां से चर्चा में हैं।

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