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कम वजन वाले बच्चों को हृदय रोग का खतरा ज्यादा, जानिए क्यों

  Birth Weight Determines Future Heart Disease Risk : लंदन: वैज्ञानिकों ने एक नई खोज में बताया है कि जन्म के समय कम वजन और बड़े होकर होने वाली हृदय रोगों के बीच एक खास रिश्ता है। ये रिश्ता माँ और बच्चे के साझा किए गए खास तरह के जीन की वजह से बनता है। पहले भी कई शोधों में पाया गया था कि कम वजन के साथ जन्मे बच्चों को बड़े होकर हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियाँ होने का खतरा ज्यादा रहता है। लेकिन, अब तक ये साफ नहीं था कि ऐसा क्यों होता है।  

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Underweight Babies at Higher Risk of Heart Disease, Know Why

लंदन: वैज्ञानिकों ने एक नई खोज में बताया है कि जन्म के समय कम वजन और बड़े होकर होने वाली हृदय रोगों के बीच एक खास रिश्ता है। ये रिश्ता माँ और बच्चे के साझा किए गए खास तरह के जीन की वजह से बनता है। पहले भी कई शोधों में पाया गया था कि कम वजन के साथ जन्मे बच्चों को बड़े होकर हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियाँ होने का खतरा ज्यादा रहता है। लेकिन, अब तक ये साफ नहीं था कि ऐसा क्यों होता है।

कुछ वैज्ञानिक मानते थे कि गर्भावस्था के दौरान पोषण की कमी बच्चे के शरीर के विकास को प्रभावित करती है, जिससे बाद में ज्यादा खाने पर दिल की बीमारियाँ हो जाती हैं। लेकिन, इस नए शोध में पाया गया कि माँ के कुछ खास जीन, जो बच्चे के जन्म के वजन को प्रभावित करते हैं, उनका असर बच्चे के दिल की बीमारी के खतरे पर भी अलग से पड़ता है, भले ही बच्चे का जन्म वजन कैसा भी हो।

फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी के शोधकर्ताओं ने बताया कि ये जीन तभी बीमारी के खतरे को बढ़ाते हैं, जब ये माँ से बच्चे को मिलते हैं।

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शोधकर्ताओं में से एक जैको लिनोनेन ने बताया, "कुछ खास जीन माँ के गर्भ में बच्चे के विकास को प्रभावित करते हैं और इस वजह से बच्चे का जन्म वजन भी कम हो सकता है। बच्चे को माँ से इन जीनों की एक कॉपी मिलती है।"

उन्होंने आगे कहा, "हमने पाया कि माँ के इन जीनों का बच्चे के जन्म के बाद होने वाली बीमारियों पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता। असल में, बच्चे के खुद के जीन उसका भविष्य का स्वास्थ्य ज्यादा प्रभावित करते हैं।"

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जेनेटिक डेटा का अध्ययन

इस शोध में 36,000 से ज्यादा माँ-बच्चे के जोड़ों के जेनेटिक डेटा का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले के जेनेटिक अध्ययनों में अलग-अलग नतीजे इसलिए आए क्योंकि उनमें माँ और बच्चे के जीनों के असर को अलग-अलग नहीं समझा जा सका था।

शोधकर्ताओं का दल अब ये पता लगाना चाहता है कि बहुत कम वजन के साथ जन्म लेने या जन्म के समय वजन में बहुत ज्यादा अंतर होने से बड़े होकर बीमारियाँ होने का खतरा कैसे बढ़ता है