
Skin Disease (photo- gemini ai)
Skin Disease: त्वचा की समस्याएं और वो भी सर्दी में न बढ़ें, यह तो संभव ही नहीं है न? त्वचा की समस्या भी कोई एक नहीं, बल्कि काफी ऐसी समस्याएं हैं जो सर्दियों में बढ़ जाती हैं। इन सभी समस्याओं का एक कारण यह होता है कि सर्दी में ठंड के कारण हवा से नमी कम हो जाती है और शुष्क हवाएं चलती हैं, जो हमारे शरीर के सबसे बाहरी अंग यानी त्वचा को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। ऐसी ही एक त्वचा की समस्या है लाइकेन प्लेनस (Lichen planus)। यह समस्या वास्तव में बैंगनी रंग के धब्बों और हमारी श्लेष्मा (mucous membrane) पर आई सूजन को दर्शाती है। मुंह और जननांगों के धब्बे अक्सर सफेद रंग के होते हैं। आइए जानते हैं कि क्या होती है लाइकेन प्लेनस और इसको कौन-कौन से कारक ट्रिगर करते हैं? इससे बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए।
लाइकेन प्लेनस वास्तव में त्वचा, बालों, नाखूनों, मुंह और जननांगों की एक बीमारी है जिसमें त्वचा पर बैंगनी रंग के खुजलीदार और ऊपर उभरे हुए पपड़ीदार धब्बे दिखाई देते हैं। ये धब्बे एक दिन में विकसित नहीं होते हैं। इनको बनने में हफ्तों का समय लगता है और सबसे खास बात यह है कि मुंह और जननांगों के धब्बे अक्सर सफेद रंग के होते हैं। ये धब्बे कई बार बहुत ज्यादा दर्दनाक हो जाते हैं, ऐसे में डॉक्टर के पास तुरंत पहुंचना आपकी सबसे बड़ी आवश्यकता बन जाती है।
लाइकेन प्लेनस का कोई एक निश्चित कारण अभी तक ज्ञात नहीं हुआ है। लेकिन यह बात तो साफ है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) द्वारा अपनी ही कोशिकाओं पर हमला करने से यह स्थिति बनती है। ऐसे कई कारण हैं जिनसे लाइकेन प्लेनस को बढ़ावा मिलता है, जो निम्न हैं:
1. हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C): हेपेटाइटिस सी वायरस से संक्रमित लोगों में इसका खतरा आम लोगों की तुलना में बहुत ज्यादा होता है।
2. दवाएं: कई ऐसी दर्द निवारक और उच्च रक्तचाप की दवाएं हैं जो इस त्वचा की बीमारी को बहुत ज्यादा ट्रिगर करती हैं।
3. तनाव: बहुत ज्यादा तनाव और चिंता के बढ़ने से भी यह बीमारी बढ़ती है और कई बार तो इस बीमारी का एकमात्र कारण ही तनाव होता है।
लाइकेन प्लेनस के लक्षणों को कम करने के लिए सबसे जरूरी आहार है। संतुलित आहार को अपनाकर आप इसके ट्रिगर्स को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
30 Dec 2025 04:50 pm
Published on:
30 Dec 2025 03:06 pm
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