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बेंजामिन नेतन्याहू की सुनवाई से कुछ घंटे पहले बदला फैसला, सुरक्षा कारणों के चलते गवाही टली

इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की सुनवाई आखिरी समय में टाल दी गई। बताया जा रहा है कि अचानक सामने आए सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए यह फैसला लिया गया।
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भारत

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Ankit Sai

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Updated: 27 Apr 2026, 2:58 PM IST

Benjamin Netanyahu

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। (Photo- IANS)

PM Benjamin Netanyahu: इजरायल की राजनीति और न्याय व्यवस्था के बीच चल रही सबसे चर्चित कानूनी लड़ाई में एक बार फिर रुकावट आ गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) की गवाही, जो आज फिर से शुरू होनी थी, वह सुनवाई से कुछ घंटे पहले ही टाल दी गई। आखिरी समय में सुनवाई टालने की वजह सामने आई है। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए यह फैसला लिया गया।

आखिरी समय में बदला फैसला

करीब दो महीने के अंतराल के बाद कोर्ट में सुनवाई दोबारा शुरू होनी थी। यह ब्रेक ईरान के साथ बढ़े तनाव की वजह से लिया गया था। लेकिन जैसे ही सुनवाई शुरू होने की तैयारी पूरी हुई, नेतन्याहू के वकील Amit Hadad ने सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं अदालत के सामने रख दीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन चिंताओं को गंभीर मानते हुए सुनवाई को तुरंत रोक दिया गया। हालांकि इन खतरों की असली वजह क्या है और गवाही कब तक टलेगी, इस पर अभी कोई साफ जानकारी सामने नहीं आई है।

कोर्ट ने पहले ही रद्द की थी पेशियां

इससे पहले भी पिछले हफ्ते यरुशलम जिला अदालत ने नेतन्याहू की इस हफ्ते की सभी पेशियों को रद्द कर दिया था। अदालत ने यह फैसला बचाव पक्ष की उस दलील के बाद लिया, जिसमें सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों का हवाला दिया गया था। राज्य अभियोजन पक्ष यानी स्टेट अटॉर्नी ऑफिस ने इस पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री को अपनी समय-सारणी कोर्ट के हिसाब से तय करनी चाहिए ताकि जिरह पूरी हो सके, क्योंकि यह जनहित का मामला है।

जानिए क्या है पूरा मामला, केस (4000)

यह पूरा मामला 'केस 4000' से जुड़ा है, जिसे नेतन्याहू के खिलाफ सबसे गंभीर केस माना जाता है। आरोप है कि उन्होंने कारोबारी Shaul Elovitch की कंपनी Bezeq को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी फैसलों में हस्तक्षेप किया। इसके बदले में उन्हें Walla न्यूज वेबसाइट पर अपने पक्ष में खबरें दिलाने का आरोप है। हालांकि नेतन्याहू ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है।

गवाह की गवाही पर भी उठे सवाल

इस केस में अहम गवाह रहे श्लोमो फिल्बर की गवाही भी विवादों में रही है। साल 2022 में उनकी गवाही में कई विरोधाभास सामने आए थे। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने उन्हें सरकारी गवाह का दर्जा वापस लेने तक की मांग कर दी थी। नेतन्याहू ने पहली बार दिसंबर 2024 में कोर्ट में गवाही दी थी, जबकि जिरह जून 2025 से चल रही है। फिलहाल केस उसी चरण में है, लेकिन बार-बार हो रही देरी से यह मामला और लंबा खिंचता दिख रहा है।