
कामिकाज़े ड्रोन (Photo - ANI)
रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) पिछले 54 महीने से ज़्यादा समय से जारी है। 24 फरवरी, 2022 को रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत की थी और तब से यह युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। रूस के खिलाफ मिले इंटरनेशनल सपोर्ट की वजह से यूक्रेन अभी भी युद्ध में डटा हुआ है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध में रूस को चीन (China) से बड़ी मदद मिली है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चीन की एक सरकारी कंपनी ने रूस को कामिकाज़े ड्रोन बनाने के लिए ज़रूरी पार्ट्स सप्लाई किया। इस रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि रूस के अंदरूनी दस्तावेज़ों में इन पार्ट्स की सप्लाई का ज़िक्र है। रिपोर्ट के अनुसार चाइनीज़ कंपनी ने रूस की सबसे बड़ी एनर्जी कंपनी से जुड़ी एक फर्म को ये पार्ट्स सप्लाई किए थे। इसी फर्म ने कामिकाज़े ड्रोन्स बनाए, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन में एक शॉपिंग मॉल पर हमले के लिए किया गया था।
मीडिया रिपोर्ट से पता चला कि कैसे चीन की एक सरकारी कंपनी ने रूस को ड्रोन बनाने का सामान सप्लाई किया। शिपिंग और कस्टम्स दस्तावेजों के अनुसार चाइनीज़ कंपनी ने 2026 की शुरुआत में रूस की सरकारी कंपनी 'रोसाटॉम' की एक सब्सिडियरी को 46 टन कार्बन फाइबर केमिकल भेजे थे। चाइनीज़ पार्ट्स लेने वाली कंपनी कामिकाज़े ड्रोन के अहम पार्ट्स बनाती है। यूक्रेन पर हमलों के बाद रूसी ड्रोन्स में बार-बार चीन की कंपनियों के पार्ट्स मिले हैं।
यूक्रेन सरकार के करीबी कीव बेस्ड थिंक टैंक 'यूक्रेनियन सिक्योरिटी एंड कोऑपरेशन सेंटर' ने रूसी सूत्रों से जो दस्तावेज इकट्ठा किए हैं, उनसे पहली बार पता चला है कि कैसे चीन की एक सरकारी कंपनी ने रूस को ड्रोन बनाने के पार्ट्स सप्लाई किए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दस्तावेजों से पता चलता है कि कार्बन फाइबर केमिकल की एक खेप चीन की सरकारी कंपनी 'जिलिन केमिकल फाइबर ग्रुप' और 'अलाबुगा-वोलोकनो' के वेयरहाउस के बीच भेजी गई थी। 'अलाबुगा-वोलोकनो', 'रोसाटॉम' के एडवांस मैटीरियल्स और कंपोज़िट्स डिवीज़न 'यूमाटेक्स' की एक सब्सिडियरी है। इस शिपमेंट के लिए सिविलियन सिंथेटिक फाइबर एक्सपोर्ट के कस्टम्स कोड का इस्तेमाल किया गया था। 2026 के दस्तावेजों में दोनों कंपनियों के बीच कार्गो ट्रांसपोर्टेशन, कस्टम्स क्लीयरेंस और कार्गो इंश्योरेंस समेत फ्रेट फॉरवर्डिंग सर्विसेज़ की पूरी रेंज का ज़िक्र है। यह सर्विस दो शिपिंग कंटेनरों के लिए थी, जिनमें मैन्युफैक्चरिंग के मकसद से 46 टन पॉलीएक्रिलोनिट्राइल टो (पैन-प्रीकर्सर) ले जाया जा रहा था।
पहले भी कई बार चीन पर रूस की मदद करने की बात कही गई है। हालांकि चीन की सरकार ने हर बार इन दावों को खारिज किया है और युद्ध के अंत के लिए शांति का प्रस्ताव दिया है।
Updated on:
7 Sep 2026, 9:14 PM IST
Published on:
7 Sep 2026, 9:14 PM IST
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