
डोनाल्ड ट्रंप(फोटो-IANS)
US China Cyber War: अमेरिकी अधिकारियों ने बुधवार को चीन से जुड़े एक बड़े कथित साइबर-जासूसी का खुलासा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, चीनी सेना और खुफिया सेवाओं से जुड़े हैकर्स ने एक चीनी टेक कंपनी की मदद से अमेरिकी सरकारी और महत्वपूर्ण संस्थानों के नेटवर्क में घुसपैठ करने की कोशिश की। इसमें NASA, फेडरल रिजर्व, न्याय विभाग, ऊर्जा विभाग और अमेरिकी सीनेट समेत कई अहम संस्थानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, हैकर्स ने सरकारी नेटवर्क के अलावा सैन्य नेटवर्क, अस्पतालों, बिजली कंपनियों और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को भी निशाना बनाया। अधिकारियों ने कहा कि हमलावरों ने अपनी पहचान और गतिविधियों को छिपाने के लिए एक चीनी टेक कंपनी के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल किया।
अमेरिकी न्याय विभाग ने आगे होने वाले संभावित नुकसान को रोकने के लिए बुधवार को उस चीनी कंपनी से जुड़े तीन इंटरनेट डोमेन जब्त किए। इसके अलावा अमेरिकी एजेंसियां हैकर्स के इस्तेमाल किए गए तरीकों से जुड़ी एक साइबर सिक्योरिटी एडवाइजरी जारी करने की तैयारी कर रही हैं। इस एडवाइजरी का मकसद उन कंपनियों और संस्थानों की मदद करना है, जिनके नेटवर्क में कथित तौर पर हमलावरों ने सेंध लगाई है। इसके जरिए प्रभावित संस्थान घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें अपने नेटवर्क से बाहर निकालने के लिए जरूरी कदम उठा सकेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि कथित इस जासूसी से कितना नुकसान हुआ, इसका पूरा आकलन अभी सामने नहीं आया है। इसका वास्तविक प्रभाव जानने के लिए किए जा रहे काउंटरइंटेलिजेंस आकलन का बड़ा हिस्सा सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। अमेरिकी अधिकारियों का यह भी कहना है कि चीनी हैकिंग अभियानों का निशाना लंबे समय से अमेरिका के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे रहे हैं। इनमें बिजली और बैंकिंग संस्थानों जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
साइबर सुरक्षा लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच तनाव का एक अहम मुद्दा रही है। 2023 में अमेरिकी अधिकारियों ने चीन पर अमेरिकी सैन्य परिवहन नेटवर्क, जल और बिजली कंपनियों में सेंध लगाने का आरोप लगाया था। अमेरिकी अधिकारियों ने उस समय आशंका जताई थी कि इन नेटवर्कों में घुसपैठ का उद्देश्य भविष्य में ताइवान को लेकर संभावित सैन्य संघर्ष की स्थिति में अमेरिका की प्रतिक्रिया को प्रभावित या बाधित करना हो सकता है। अमेरिका ने इन गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि ऐसे लक्ष्यों में घुसपैठ का कोई वैध खुफिया उद्देश्य नहीं था। चीन ने इन आरोपों से इनकार किया था।
Updated on:
26 Aug 2026 09:20 pm
Published on:
26 Aug 2026 08:47 pm
