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China’s RoboCop: चीन की सड़कों पर उतरा ‘टर्मिनेटर’ पुलिसवाला रोबोट, और जवानों को साथ देख उड़े दुनिया के होश

China's Terminator: चीन ने एक उन्नत ह्यूमनॉइड रोबोट को पुलिस गश्ती दल में शामिल किया है। टर्मिनेटर जैसा दिखने वाला यह रोबोट कैसे काम करता है और क्या यह भविष्य की सुरक्षा का आधार बनेगा? जानें सब कुछ।

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भारत

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MI Zahir

Jan 01, 2026

China's RoboCop

चीन सड़कों पर उतरा 'टर्मिनेटर' पुलिसवाला। (स्क्रीन शॉट: X Handle @rarebird_arewa)

Humanoid: दुनिया खूब तरक्की कर रही है, लेकिन जैसे-जैसे यह दुनिया तरक्की कर रही है, वैसे -वैसे हर तकनीक लोगों की नौकरियां छीन रही ​है। इसकी एक झलक चीन (Chinese Tech 2026) की सड़कों पर नजर आई। जिसे देख कर कहा जा सकता है कि पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की नौकरियों पर 'खतरे की तलवार लटक रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक ताजा वीडियो ने वैश्विक स्तर पर इस पर बहस छेड़ दी है। इस वीडियो में एक अत्याधुनिक 'ह्यूमनॉइड रोबोट' (इंसान जैसा दिखने वाला मशीनी मानव) पुलिस की वर्दी पहने असली जवानों के साथ गश्त व कदमताल (Humanoid Robot Patrol) करता हुआ नजर आ रहा है। इसे देख कर ऐसा लगता है मानो हॉलीवुड की मशहूर फिल्म 'रोबोकॉप' (China Robot Cop) का किरदार पर्दे से निकल कर असल जिंदगी में आ गया हो।

Humanoid: मशीनी शरीर और इंसानी चाल

चीन का यह नया 'टर्मिनेटर कॉप' तकनीक का एक बेजोड़ नमूना है। यह रोबोट केवल पहियों पर चलने वाली कोई मशीन नहीं है, बल्कि इसके दो पैर हैं और यह बिल्कुल इंसानों की तरह संतुलन बना कर चलती है। वीडियो में इसकी बनावट और चलने का तरीका इतना सटीक है कि पहली नजर में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि यह कोई इंसान है या मशीन। वर्दीधारी सुरक्षाबलों के साथ इसकी गश्त यह संकेत देती है कि आने वाले समय में चीन अपनी पुलिसिंग व्यवस्था पूरी तरह से हाई-टेक बनाने जा रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सुरक्षा का संगम (Terminator Reality)

यह रोबोट उन्नत एआई (AI) और सेंसर्स से लैस है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह भीड़भाड़ वाले स्थानों पर चेहरों की पहचान (Facial Recognition) करने, संदिग्ध बैग या वस्तुओं का पता लगाने और आपातकालीन स्थिति में तुरंत मुख्यालय को सूचना भेजने में सक्षम है। जहाँ हाड़-मांस का सिपाही लंबी ड्यूटी के बाद थक सकता है, वहीं यह मशीनी सिपाही 24 घंटे बिना रुके निगरानी कर सकता है। इसकी धातु से बनी बॉडी इसे उन खतरनाक स्थितियों में भी डटे रहने की शक्ति देती है जहाँ इंसानी जान को जोखिम हो सकता है।

दुनिया भर से तीखी और रोचक प्रतिक्रियाएं

इस वायरल वीडियो पर दुनिया भर से तीखी और रोचक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। तकनीक प्रेमियों ने इसे "इंसानी बुद्धिमत्ता की जीत" बताया है, वहीं कई लोग इसे देखकर डरे हुए भी हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि यह नजारा किसी भविष्यगामी 'डिस्ट्रोपियन' फिल्म जैसा है जहाँ मशीनों का राज होगा। एक वर्ग का यह भी मानना है कि पुलिसिंग में रोबोट का इस्तेमाल नागरिक अधिकारों और निजता (Privacy) के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

अब क्या यह सिर्फ शुरुआत है? (AI Future Policing)

सूत्रों की मानें तो चीन इस तरह के रोबोटिक यूनिट्स को केवल परीक्षण (Trial) तक सीमित नहीं रखेगा। बीजिंग और शंघाई जैसे बड़े शहरों के संवेदनशील इलाकों, जैसे एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर इन्हें स्थाई रूप से तैनात करने की योजना बनाई जा रही है। अगले चरण में इन रोबोट्स को 'स्मार्ट कमांड सेंटर' से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे वे बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के छोटे-मोटे अपराधों को रोकने में सक्षम होंगे।

वैश्विक शक्ति प्रदर्शन बनाम तकनीकी श्रेष्ठता दिखाने का तरीका

यह केवल एक पुलिस रोबोट नहीं है, बल्कि चीन का दुनिया को अपनी तकनीकी श्रेष्ठता दिखाने का एक तरीका भी है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ जारी 'टेक-वॉर' के बीच चीन यह संदेश दे रहा है कि वह रोबोटिक्स और एआई के मामले में किसी से पीछे नहीं है। हालांकि, आलोचक इसे 'निगरानी तंत्र' (Surveillance State) को और मजबूत करने के औजार के रूप में देख रहे हैं।

'रोबोकॉप' का भारत के लिए क्या है मतलब

भारत में यदि 'रोबोकॉप' जैसी तकनीक हकीकत बनती है, तो इससे पुलिसिंग के बुनियादी ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव आ जाएगा, लेकिन इसके साथ ही पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की नौकरियों पर 'खतरे की तलवार' लटकने की चिंता भी वाजिब है। भारतीय परिस्थितियों में, जहाँ अत्यधिक जनसंख्या और जटिल गलियां हैं, वहाँ ये रोबोट ट्रैफिक नियंत्रण, चालान काटने और सीसीटीवी कैमरों के साथ मिल कर निगरानी जैसे कार्यों में इंसानों से कहीं अधिक सटीक और ईमानदार साबित हो सकते हैं, जिससे निचले स्तर के पदों पर भर्ती कम होने की संभावना बढ़ जाएगी। हालाँकि, पूरी तरह से नौकरियों का खत्म होना मुश्किल है, क्योंकि भारत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल डेटा ही नहीं, बल्कि 'इंसानी समझ' और 'मौके पर सूझबूझ' (जैसे उग्र भीड़ को संभालना या सहानुभूति दिखाना) की आवश्यकता होती है, जो फिलहाल किसी रोबोट के बस की बात नहीं है। ऐसे में यह तकनीक नौकरियों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय पुलिसकर्मियों की भूमिका को बदलकर उन्हें 'मशीन ऑपरेटर' या 'तकनीकी विश्लेषक' बनने पर मजबूर कर देगी।

मशीनी युग का आगाज़ : एक क्रांतिकारी कदम

बहरहाल, चीन का यह 'रोबोकॉप' हमें एक ऐसे भविष्य की ओर ले जा रहा है जहाँ इंसान और मशीन कंधे से कंधा मिला कर काम करेंगे। हालांकि यह सुरक्षा की दृष्टि से एक क्रांतिकारी कदम है, लेकिन नैतिक और सामाजिक स्तर पर इसके परिणामों को लेकर बहस अभी शुरू ही हुई है।