
ग्वादर पोर्ट (Photo - ANI)
पाकिस्तान (Pakistan) में स्थित ग्वादर पोर्ट (Gwadar Port) चीन (China) के एक बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक है। यह पोर्ट चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का मुख्य हिस्सा और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का अहम प्रोजेक्ट है। हालांकि अब इस बात की संभावना जताई जा रही है कि चीन इसे छोड़ सकता है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के पॉलिसी थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें इस बात की संभावना जताई गई है।
ऑस्ट्रेलिया के पॉलिसी थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन का ग्वादर पोर्ट प्रोजेक्ट कई आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों की वजह से एक बड़े ट्रेड कॉरिडोर के तौर पर इसके बने रहने पर खतरा मंडरा रहा है। इसे चलाने में आने वाले भारी खर्च की वजह से चीन आखिरकार इस पोर्ट को छोड़ सकता है।
शिनजियांग से ग्वादर तक सामान ले जाने के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान से गुज़रना पड़ता है। ये इलाके सांप्रदायिक हिंसा, तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी और बलूच लिबरेशन आर्मी की गतिविधियों और गहरे स्थानीय विद्रोह से जूझ रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा का भी बड़ा खतरा रहता है क्योंकि आतंकी और उग्रवादी अक्सर ही सामान ले जाने वाले काफिलों को निशाना बनाते हैं। ये संगठन चीन को अपने प्राकृतिक संसाधनों को लूटने का आरोपी मानते हैं और अक्सर ही चीन के इंजीनियरों पर भी हमला करते हैं।
चीन की इंजीनियरिंग यूनिट्स, काफिले और इंफ्रास्ट्रक्चर खतरनाक आतंकी हमलों और गुरिल्ला हमलों के मुख्य निशाने बन गए हैं, जो चिंता का विषय है। चीन से काम करने आए नागरिकों को ज़्यादा से ज़्यादा नुकसान पहुंचाने के मकसद से किए गए कई हमलों के कारण पाकिस्तान को स्पेशल सिक्योरिटी डिवीज़न भी बनाने पड़े, लेकिन फिर भी सुरक्षा में सुधार नहीं हुआ।
इसके अलावा सामान को 4,600 मीटर से ज़्यादा ऊंचाई वाले काराकोरम हाईवे से ले जाना पड़ता है। यह इलाका लैंडस्लाइड, बर्फीले तूफान और खराब मौसम के लिए जाना जाता है, जिससे यहाँ से बड़ी मात्रा में कंटेनर ले जाना मुश्किल हो जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्वादर तेज़ी से एक निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है। पहले से कर्ज़ के तले दबा पाकिस्तान इसे सुरक्षित रखने या बनाए रखने का खर्च नहीं उठा पा रहा है। वहीँ चीन के लिए भी कमर्शियल तौर पर यह प्रोजेक्ट फ्लॉप हो चुका है और इसकी सुरक्षा के लिए अपना पैसा और नागरिकों की जान गंवाने से वो परेशान है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि चीन अपनी ऑपरेशनल गतिविधियों को कम करके धीरे-धीरे इस पोर्ट से पीछे हट जाएगा।
Updated on:
26 Sept 2026 06:27 pm
Published on:
26 Sept 2026 05:42 pm
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
