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दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर बनाकर चीन ने अमेरिका को पछाड़ा, पर AI के मामले में एलन मस्क ने बचा ली US की इज्जत

worlds fastest supercomputer: चीन ने अमेरिका को पछाड़कर दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर LineShine बना लिया है, लेकिन AI काम के लिए अभी भी पीछे? पढ़ें पूरी खबर...

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भारत

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Mukul Kumar

Jun 23, 2026

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (फाइल फोटो : ANI)

दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर बनाकर चीन ने टेक्नोलॉजी की रेस में एक बार फिर अमेरिका को मात दे दी है। शेनझेन के नेशनल सुपरकंप्यूटिंग सेंटर का LineShine सिस्टम अब टॉप 500 लिस्ट में नंबर एक पर पहुंच गया है। तीन साल बाद चीन की इस मामले में वापसी हुई है।

हालांकि, AI के मामले में अभी भी अमेरिका को चीन पछाड़ नहीं पाया है, एलन मस्क XAi ने दुनिया भर में अमेरिका की इज्जत बचा ली है। इस मामले में अमेरिका दुनिया में सबसे आगे है।

इस बीच, एक्सपर्ट्स यह कह रहे हैं कि सबसे तेज सुपरकंप्यूटर के जरिए चीन की कोशिश है कि दुनिया को दिखाया जाए- हम अमेरिकी चिप्स के बिना भी आगे बढ़ सकते हैं।

घरेलू चिप्स से बना सिस्टम

LineShine पूरी तरह से चीन में डिजाइन किए गए चिप्स पर चलता है। इसमें कोई एडवांस्ड अमेरिकी AI चिप नहीं लगी है। अमेरिका के एल कैपिटन को पीछे छोड़कर यह टॉप पर आया।

एल कैपिटन अमेरिकी सरकार का सिस्टम है जो न्यूक्लियर हथियारों के रखरखाव के लिए इस्तेमाल होता है। लेकिन टॉप 500 लिस्ट AI काम को नहीं मापती।

यह पुरानी तरह के साइंटिफिक कैलकुलेशन को देखती है। AI बेंचमार्क में LineShine सिर्फ चौथे नंबर पर है। यानी AI ट्रेनिंग या बड़े मॉडल चलाने में यह उतना ताकतवर नहीं है।

अमेरिका-चीन की टेक जंग

ट्रंप सरकार ने सोमवार को क्वांटम कंप्यूटिंग पर एक बड़ा एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया। इसका मकसद चीन को पीछे छोड़ना है। पिछले सालों में अमेरिका ने चिप एक्सपोर्ट पर सख्ती की थी। इसी वजह से 2023 के बाद चीन अपनी सिस्टम टॉप 500 में नहीं डाल रहा था।

अब अचानक नया सिस्टम सबमिट करके चीन ने दिखा दिया कि उसकी घरेलू टेक्नोलॉजी तैयार है। रॉयटर्स ने इंटरसेक्ट 360 रिसर्च के सीईओ एडिसन स्नेल के हवाले से बताया कि उन्हें आश्चर्य इस बात का है कि चीन ने इसे सबमिट किया और रिकग्निशन चाहते हैं।

AI की असली ताकत कहीं और

एक्सपर्ट्स का कहना है कि असली AI सुपरकंप्यूटर तो क्लाउड कंपनियों के पास हैं। माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, गूगल और खासकर एलन मस्क की xAI का कोलोसस सिस्टम एल कैपिटन से भी ज्यादा पावरफुल माना जा रहा है। लेकिन ये कंपनियां टॉप 500 में हिस्सा नहीं लेतीं।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के जिमी गुडरिच ने कहा- अगर हाइपरस्केलर्स अपनी सिस्टम सबमिट करें तो यह दुनिया का सबसे तेज टॉप फाइव में भी नहीं आएगा।

चीन अभी भी एडवांस्ड AI चिप्स बनाने के लिए जरूरी टूल्स पर अमेरिकी पाबंदियों का सामना कर रहा है। इसलिए LineShine दिखाता है कि चीन सेल्फ-सफिशिएंट बनना चाहता है, लेकिन AI फ्रंटियर पर अभी चुनौतियां बाकी हैं।