शोध में वैज्ञानिकों का प्रस्ताव है कि कई साल तक हर सेकंड करीब आठ गैलन (30 लीटर) की दर से छोटे कणों (नैनोरॉड्स) को लगातार मंगल के वातावरण में छोड़ा जाए। चूंकि मंगल की सतह पर लोहा और एल्युमिनियम प्रचुर मात्रा में हैं, इसलिए ऐसे कणों के निर्माण के लिए वहां उपकरण भेजा जाए। एक शोधकर्ता ने कहा, इस पर कितना खर्च होगा, इसका हिसाब फिलहाल नहीं लगाया गया है।