2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

हार्वर्ड में 31% विदेशी छात्र…यह बहुत ज्यादा, हमारे बच्चों को नहीं मिला मौका: डोनाल्ड ट्रंप

Donald Trump attacks Harvard: हार्वर्ड विश्वविद्यालय के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, हार्वर्ड के साथ समस्या का एक हिस्सा यह है कि हार्वर्ड में आने वाले लगभग 31% विदेशी हैं।
less than 1 minute read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Shaitan Prajapat

•

Updated: 26 May 2025, 7:26 AM IST

US President Donald Trump (Image- ANI)

Donald Trump attacks Harvard: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर हार्वर्ड विश्वविद्यालय को निशाने पर लिया है। उन्होंने हार्वर्ड में विदेशी छात्रों की अधिक संख्या और विश्वविद्यालय के कथित यहूदी विरोधी रुख को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप ने कहा कि हार्वर्ड में पढ़ने वाले छात्रों में लगभग 31% विदेशी हैं, जो एक चिंताजनक आंकड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिका जब अरबों डॉलर का अनुदान हार्वर्ड को देता है, तो इतनी बड़ी संख्या में विदेशी छात्रों को प्रवेश क्यों दिया जाता है।

'हम हार्वर्ड को बहुत अधिक अनुदान देते हैं'

ट्रंप ने कहा, हम हार्वर्ड को बहुत अधिक अनुदान देते हैं, लेकिन वे हमें यह नहीं बताते कि ये 31% विदेशी छात्र कौन हैं। हम यह जानना चाहते हैं कि वे कहां से हैं और क्या वे देश की सुरक्षा के लिहाज से उपयुक्त हैं या नहीं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब हार्वर्ड को मिलने वाले अनुदान की समीक्षा की जा सकती है।

‘हार्वर्ड बहुत यहूदी विरोधी है’

इसके अलावा, ट्रंप ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय पर यहूदी विरोधी रुख अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, हर कोई जानता है कि हार्वर्ड यहूदी विरोधी है और यह रुख अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

यह भी पढ़ें- Monsoon 2025 Update: 16 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, जानें आपके राज्य में कब आएगा मानसून?

ट्रंप के बयानों से शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों में बहस

ट्रंप के इन बयानों से शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख न केवल शिक्षा में विविधता और समावेशिता के खिलाफ है, बल्कि यहूदी समुदाय और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के प्रति पूर्वाग्रह को भी दर्शाता है। वहीं, उनके समर्थक इसे “अमेरिकन फर्स्ट” नीति का हिस्सा बता रहे हैं।