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Congo Ebola Outbreak: कांगो में इबोला का प्रकोप तेज, 2,011 संक्रमित, 754 लोगों की मौत; WHO ने जताई चिंता

Ebola in Congo: कांगो में इबोला का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। यहां 2,011 मामले सामने आ चुके हैं और 754 लोगों की मौत हो चुकी है। WHO ने चेतावनी दी है कि 80% नए मामलों के संक्रमण स्रोत का अब तक पता नहीं चल पाया है।
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Ebola outbreak in Congo.

प्रतीकात्मक तस्वीर - IANS

Congo Ebola cases: अफ्रीकी देश कांगो में इबोला कहर बरपा रहा है। यहां इबोला के मामलों की संख्या बढ़कर 2,011 हो गई है, जबकि अब तक 754 लोगों की मौत हो चुकी है। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप है।

कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 753 मरीज अभी भी आइसोलेशन में हैं या अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं, 366 लोग अब तक ठीक होकर घर लौट चुके हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की पहचान अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिलहाल केवल 67% संपर्कों तक ही स्वास्थ्य टीमें पहुंच सकी हैं।

बता दें कि मध्य अफ्रीका का यह देश 15 मई से इबोला के प्रकोप से जूझ रहा है। प्रकोप शुरू होने के दो महीने बाद भी संक्रमण इतनी तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए इसकी रफ्तार पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंगलवार को बताया कि नए मामलों में कम से कम 80% ऐसे हैं, जिनके संक्रमण का स्रोत या संपर्क का अब तक पता नहीं चल पाया है।

क्या है इबोला?

इबोला एक गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो इबोला वायरस के कारण होती है। यह इंसानों के साथ-साथ कुछ जंगली जानवरों, जैसे चमगादड़ और बंदरों, को भी संक्रमित कर सकती है। यह बीमारी पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आई थी।

यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, मल, लार, पसीने या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसके अलावा, संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने या उनका मांस खाने से भी संक्रमण हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, बिस्तर या चिकित्सा उपकरणों के संपर्क में आने से भी यह बीमारी फैल सकती है।

इबोला के इलाज के लिए अब कुछ स्वीकृत दवाएं और टीके उपलब्ध हैं, लेकिन उनका उपयोग वायरस के प्रकार और प्रकोप की स्थिति पर निर्भर करता है।

बचाव कैसे करें?

संक्रमित व्यक्ति या उसके शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से बचें। हाथों की नियमित रूप से सफाई करें। स्वास्थ्यकर्मी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल करें। प्रकोप वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।