
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई। ( फोटो : X/ @IRIMFA_EN)
US-Israel Iran War Supported Countries: ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका-इजरायल के साथ कई देशों ने भाग लिया था। ईरान का दावा है कि उसके पास इस बात के ठोस सुबूत हैं और इन देशों को कोर्ट में घसीटा जाएगा और उन्हें परिणाम भुगतने होंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बगाई ने यह दावा किया है ईरान के पास 'पक्के सुबूत' हैं कि इलाके के कुछ देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध में हिस्सा लिया था और इसलिए उन्हें कानूनी नतीजों का सामना करना पड़ सकता है। बगाई ने कहा, हमें यह देखकर बहुत अफसोस है लेकिन हम इस मामले में जो भी जरूरी कदम होगा, वह उठाना पड़ेगा। उन्होंने स्विटजरलेंड में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस आशय का आरोप लगायाउन्होंने स्विटजरलेंड में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस आशय का आरोप लगाया उनका कहना है कि तेहरान इसके जवाब में जरूरी कदम उठाएगा।
हाउस ऑफ कॉमन्स लाइब्रेरी के अनुसार इस संघर्ष के दौरान पश्चिमी और खाड़ी देशों के एक बड़े गठबंधन ने अमेरिका और इजरायल का समर्थन किया। यह समर्थन मुख्य रूप से सीधे बचाव मसलन मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने और लॉजिस्टिकल या कूटनीतिक मदद के रूप में था।
मुख्य अंतरराष्ट्रीय समर्थकों में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के अनुसार सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत ने इस कोशिश में सीधे हिस्सा लिया। उन्होंने अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा के लिए अपने एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया और ईरान से आ रहे ड्रोन और मिसाइलें रोकीं।
यूनाइटेड किंगडम ने प्रोजेक्टाइल मिसाइल आदि को रोक कर, कतर में पहले से तैनात विमानों का इस्तेमाल कर के और बहरीन, कुवैत व सऊदी अरब में एयर डिफेंस तैनात कर के सीधे बचाव करने में अमेरिका और इजरायल की मदद दी।
हाउस ऑफ कॉमन्स लाइब्रेरी के मुताबिक अन्य पश्चिमी सहयोगी देशों फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने कूटनीतिक समर्थन और सैन्य लॉजिस्टिकल मदद दी। वहीं फ्रांस ने सीमित रक्षात्मक सहायता भी की।
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरानी ठिकानों के खिलाफ एक संयुक्त हमला कर जंग शुरू की थी , जिसे उन्होंने 'पूर्व-नियोजित' हमला बताया था, और ट्रंप ने "प्रमुख लड़ाकू अभियानों" की शुरुआत की घोषणा की थी। हमले में अमेरिका-इजरायल के हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी और मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता का स्थान लेकर ईरान के नए सुप्रीम लीडर का पद संभाला था।
ईरान और अमेरिका 8 अप्रेल को दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हुए थे और बाद में इस युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया और यह अभी भी लागू है।
Published on:
23 Jun 2026 03:31 pm
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