
Masoud Pezeshkian and Donald Trump
US Iran Deal: स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत के बाद एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते में परमाणु निरीक्षण, क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों में संभावित राहत और आर्थिक सहयोग समेत कई मुद्दों को शामिल किया गया है। दोनों देशों ने इन विषयों पर अगले 60 दिनों तक विस्तृत बातचीत जारी रखने पर भी सहमति जताई है। हालांकि समझौते का एक हिस्सा सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया है। यह हिस्सा ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के फंड से जुड़ा है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस योजना में अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा खर्च नहीं होगा। इसके बावजूद वॉशिंगटन में इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है। विपक्षी नेताओं के साथ-साथ कुछ रिपब्लिकन सांसद भी सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी योजना की जरूरत क्या है और इसका असर क्या होगा। यही वजह है कि यह प्रस्ताव समझौते का सबसे चर्चित और विवादित हिस्सा बन गया है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच साइन हुए एमओयू में कम से कम 300 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास योजना तैयार करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य सालों से प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे ईरान में निवेश बढ़ाना और विकास परियोजनाओं को गति देना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते में यह साफ नहीं किया गया है कि इतनी बड़ी राशि कहां से आएगी और इसका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा। इसके लिए 60 दिनों की बातचीत अवधि तय की गई है जिसके दौरान फंड के लिए पैसा जुटाने और पूरी योजना को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी।
समझौते के सामने आने के बाद अमेरिका में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या वॉशिंगटन ईरान को 300 अरब डॉलर देने जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे दावों को खारिज करते हुए उन्हें 'फेक न्यूज' बताया है।
अल जजीरा के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि इस व्यवस्था के तहत अमेरिकी धन का एक भी सेंट ईरान को नहीं जाएगा। उनका कहना है कि यह कोई सरकारी भुगतान नहीं है और इसका मकसद निवेश को बढ़ावा देना है।
वेंस ने कहा कि इस फंड के लिए खाड़ी देशों और दुनिया भर के निजी निवेशकों से पैसा आ सकता है। हालांकि अब तक किसी भी देश ने खुलकर यह नहीं कहा है कि वह इस योजना के लिए पैसा देगा।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फंड के लिए सरकारी मदद की बजाय निजी निवेशकों से पैसा जुटाने की प्लानिंग है। यानी इसे किसी आर्थिक सहायता पैकेज या मुआवजे की तरह नहीं देखा जा रहा है।
रिपोर्ट में बातचीत से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि प्रस्तावित राशि के आधे से ज्यादा हिस्से के लिए निजी निवेशकों की शुरुआती सहमति मिल चुकी है। साथ ही फंड में किसी सरकार का पैसा शामिल नहीं होगा। इसे ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत या विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों से भी अलग रखा जाएगा।
अल जजीरा के मुताबिक, इस योजना को लेकर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के कुछ नेताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 300 अरब डॉलर जैसी बड़ी योजना के बारे में अभी कई बातें साफ नहीं हैं।
डेमोक्रेटिक सीनेटर एमी क्लोबुचर ने कहा कि इतनी बड़ी राशि का इस्तेमाल अमेरिका में आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर और प्रतिनिधि सभा सदस्य जेसन क्रो ने भी इस प्रस्ताव की आलोचना की है। वहीं रिपब्लिकन सीनेटर रोजर विकर ने इसकी तुलना 2015 के ईरान परमाणु समझौते से करते हुए चिंता जताई है।
अल जजीरा के मुताबिक, 2015 में हुए JCPOA परमाणु समझौते के तहत ईरान को विदेशों में फंसी करीब 55 अरब डॉलर की अपनी संपत्तियों तक पहुंच मिली थी। बदले में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए थे।
अब आलोचकों का कहना है कि नए समझौते में प्रस्तावित 300 अरब डॉलर का फंड उस समय मिले आर्थिक लाभ से कहीं बड़ा है। यही वजह है कि इसकी तुलना बार-बार 2015 के परमाणु समझौते से की जा रही है।
अल जजीरा के मुताबिक, 300 अरब डॉलर के फंड के अलावा नए एमओयू में ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों और विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों पर भी चर्चा की बात कही गई है।
वहीं खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता हाल के महीनों में ईरान, इजरायल और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच बढ़े तनाव को कम करने की कोशिशों का हिस्सा है।
हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि 300 अरब डॉलर का फंड कहां से आएगा और इसमें कौन-कौन निवेश करेगा। इन सवालों पर अगले 60 दिनों की बातचीत के दौरान और जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल यह फंड अमेरिका-ईरान समझौते का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा बना हुआ है।
Updated on:
23 Jun 2026 03:41 pm
Published on:
23 Jun 2026 03:08 pm
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