23 जून 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

क्या ईरान ने बना ली है ड्रोन बनाने वाली टेक्नोलॉजी? मार कर गिराए गए F-15 के अमेरिकी पायलट ने बताया आंखो देखा हाल

F-15 Pilot Claim: क्या ईरान ने नई ड्रोन टेक्नोलॉजी बना ली है? अमेरिकी F-15 पायलट के 'जेलीफिश' जैसे ड्रोन देखने के दावे ने अमेरिकी एजेंसियों के बीच हलचल बढ़ा दी है। पढ़िए क्या है पूरा मामला?
3 min read
Google source verification

भारत

image

Rahul Yadav

Jun 23, 2026

Iran Drone Technology, Iranian Drones, F-15 Pilot Claim, US Fighter Jet Downed, Iran US Conflict, Jellyfish Drone Formation, Iran Drone Program, US Intelligence, Iranian Military Technology, Drone Swarm Technology,

एफ-15 फाइटर (फोटो सोर्स - बोइंग)

Iran Drone Technology: लंबे समय से चले आ रहे ईरान और अमेरिका संघर्ष के बीच स्विट्जरलैंड में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में साइन हुए एमओयू ने अब थोड़ी राहत जरूर दी है। हालांकि, यह फाइनल समझौता नहीं है, दोनों देशों के पास 60 दिन का समय है सबकुछ ठीक रहा तो इसके बाद अंतिम फैसला हो सकता है।

अप्रैल 2026 में दोनों देशों के संघर्ष के बीच एक खबर आई थी कि अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान को ईरान ने मार गिराया है। इस विमान में 2 पायलट थे। जिसमे से एक पायलट को अमेरिका ने घटना के कुछ घंटों के भीतर ऑपरेशन को अंजाम देकर सुरक्षित निकाल लिया था, वहीं दूसरे क्रू मेंबर को निकालने के लिए एक दिन से भी ज्यादा का समय लग गया था। अब इसी क्रू मेंबर (पायलट) ने ईरान में उस दरमियान जो कुछ भी देखा उसने अमेरिका सुरक्षा एजेंसियों के बीच हलचल बढ़ा दी है।

CNN की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, विमान से बाहर निकलने से ठीक पहले पायलट ने आसमान में कई ईरानी ड्रोन को एक साथ उड़ते देखा था। उसका कहना है कि ये ड्रोन मिलकर ऐसी आकृति बना रहे थे जो उसे 'जेलीफिश' जैसी लगी। पायलट के इस दावे के बाद अमेरिकी एजेंसियों में इस बात को लेकर चर्चा कि आखिर पायलट ने क्या देखा था? क्या ईरान ने कोई नई ड्रोन टेक्नोलॉजी बना ली है?

पायलट ने आखिर क्या देखा?

बचाए जाने के बाद पायलट ने अमेरिकी अधिकारियों को बताया कि उसने आसमान में कई ड्रोन को एक साथ उड़ते देखा था। उसके मुताबिक, बड़े ड्रोन के नीचे छोटे ड्रोन थे और पूरा ग्रुप एक साथ आगे बढ़ रहा था।

रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि पायलट को यह आकृति 'जेलीफिश' जैसी लगी। वहीं एक अन्य सूत्र ने इसे हवा में बिछे 'ड्रोन के जाल' जैसा बताया।

क्या ड्रोन का विमान गिराने से कोई संबंध था?

अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि F-15 विमान आखिर किस वजह से गिरा था। मामले की जांच अभी भी जारी है। शुरुआती जांच में यह संभावना भी देखी गई कि ड्रोन का यह ग्रुप किसी तरह ईरानी पक्ष की मदद कर रहा हो। लेकिन फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विमान गिरने के बाद क्या हुआ था?

जब विमान गुरा था तब उसमे दो पायलट सवार थे, अमेरिकी सेना ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और एक पायलट को कुछ घंटों के भीतर सुरक्षित निकाल लिया गया। वहीं दूसरे पायलट ने एक दिन से ज्यादा समय तक पहाड़ों में छिपकर गिरफ्तारी से बचाव किया और बाद में उसे भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

ईरान के साथ संघर्ष के दौरान यह पहला मौका था जब किसी अमेरिकी विमान को ईरानी क्षेत्र के ऊपर मार गिराया गया था।

पायलट के दावे पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

पायलट के बयान के बाद अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय सामने आई हैं। कुछ लोगों का मानना है कि उसने वास्तव में कोई नई ड्रोन क्षमता देखी हो सकती है। वहीं कुछ अधिकारियों का कहना है कि घटना के बाद उसकी हालत को भी ध्यान में रखना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, विमान दुर्घटना में पायलट को सिर में चोट लगी थी। यही वजह है कि अधिकारी उसके बयान के हर पहलू की जांच कर रहे हैं।

नई ड्रोन तकनीक को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

CNN ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पायलट जिस तरह के ड्रोन समूह का जिक्र कर रहा था वैसी क्षमता को तकनीकी भाषा में 'वन-टू-मेनी मेश्ड नेटवर्किंग' कहा जाता है।

आसान शब्दों में कहें तो इस तकनीक की मदद से कई ड्रोन एक-दूसरे से जुड़े रहकर एक साथ काम कर सकते हैं। इससे वे एक ग्रुप की तरह उड़ान भर सकते हैं और एक-दूसरे को जानकारी भी भेज सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, रूस और चीन के पास ऐसी तकनीक होने की बात पहले भी सामने आ चुकी है। अमेरिकी अधिकारियों के सामने अब यही सवाल है कि क्या ईरान के पास भी ऐसी कोई क्षमता है या नहीं।

अभी भी कई सवालों के जवाब बाकी

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसियों ने पहले कभी यह आकलन नहीं किया था कि ईरान के पास इस तरह की ड्रोन क्षमता मौजूद है। हालांकि ऐसी रिपोर्टें पहले आती रही हैं कि ईरान को ड्रोन तकनीक विकसित करने में चीन और रूस से मदद मिली है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पायलट ने वास्तव में क्या देखा था। क्या वह कोई नई ड्रोन तकनीक थी, कोई परीक्षण था या फिर कुछ और? इन सवालों के जवाब अभी जांच के बाद ही सामने आएंगे। लेकिन पायलट के इस दावे ने अमेरिकी अधिकारियों के बीच एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है कि आखिर उसने आसमान में क्या देखा था।