
अमेरिका, इजरायल और लेबनान ने शुक्रवार को एक त्रिपक्षीय ढांचागत समझौते पर हस्ताक्षर किए। (Photo- IANS)
US-Israel-Lebanon deal: अमेरिका-इजराइल-लेबनान के 14-सूत्रीय समझौते के मसौदे को हिजबुल्लाह ने ठुकराते हुए कहा है कि यदि इसे लागू करने की कोशिश की गई तो 'गृहयुद्ध' छिड़ सकता है। दरअसल, वॉशिंगटन में इस समझौता मसौदे के तहत इजराइल और लेबनान ने प्रत्यक्ष वार्ता के जरिए युद्ध समाप्त करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है। इस प्रक्रिया में अमेरिका मध्यस्थ और समझौते के क्रियान्वयन का गारंटर बनेगा।
अमेरिका-इजराइल और लेबनान के त्रिपक्षीय समझौता मसौदे में हिजबुल्लाह का नाम सीधे तौर पर नहीं है। हालांकि, इस बात पर जोर दिया गया है कि लेबनान की सरकार पूरे देश में सभी गैर-राज्य सशस्त्र समूहों का पूर्ण और सत्यापित निरस्त्रीकरण सुनिश्चित करेगी। उनके सैन्य ढांचे को समाप्त करेगी, जिससे बल प्रयोग का अधिकार केवल राज्य के पास रहे।
त्रिपक्षीय समझौता मसौदे में निरस्त्रीकरण, निर्धारित क्षेत्रों में लेबनानी सशस्त्र बल की तैनाती और चरणबद्ध तरीके से इजराइली सेना की वापसी का भी प्रावधान है। पूरे समझौते पर अमल की निगरानी अमेरिका के समर्थन वाला एक सैन्य समन्वय समूह करेगा। अमेरिका ने लेबनान को मानवीय सहायता और युद्ध से हुए नुकसान के पुनर्निर्माण में मदद देने का भी वादा किया है।
त्रिपक्षीय समझौता मसौदे के मुताबिक, लेबनान को यह सुनिश्चित करना होगा कि गैर-राज्य सशस्त्र समूहों की देश में कोई सैन्य या सुरक्षा भूमिका नहीं हो। ऐसे समूहों के पास हथियारबंद क्षमता नहीं हो। इसमें यह भी उल्लेख है कि युद्ध और शांति से जुड़े फैसले लेने का अधिकार केवल लेबनान राज्य के पास ही होगा।
अमेरिका-इजराइल और लेबनान के त्रिपक्षीय समझौता मसौदे पर हिजबुल्लाह की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है। उसने कहा है कि वह न तो इसे स्वीकार करेगा और न ही अपने हथियार डालेगा। हिजबुल्लाह के संसदीय गुट के सदस्य हसन फदलल्लाह ने गृहयुद्ध की चेतावनी देते हुए कहा, 'लेबनानी सरकार इस समझौते को लागू नहीं कर पाएगी।' उन्होंने वॉशिंगटन समझौते को इस्लामाबाद प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश बताते हुए लेबनान और इजराइल के बीच हुई प्रत्यक्ष वार्ता की भी आलोचना की।
अमेरिका-इजराइल और लेबनान के बीच त्रिपक्षीय समझौता मसौदे के सामने आने के बाद बेरुत में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया है। हिजबुल्लाह समर्थक बेरुत की सड़कों पर उतर आए और मोटरसाइकिल रैलियां निकालीं। उन्होंने एयरपोर्ट रोड सहित शहर के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन किया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए लेबनानी सेना ने कई इलाकों में अस्थायी चौकियां स्थापित कीं। आपको बता दें कि हिजबुल्लाह लंबे समय से ऐसे किसी भी प्रस्ताव का विरोध करता रहा है, जिसमें पूरे लेबनान में उसके निरस्त्रीकरण की बात की जाती है।
Published on:
27 Jun 2026 09:43 am
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