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सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों ने फिर किया हमला, सेना और तेल के ठिकानों को बनाया निशाना

Houthis-Saudi Arabia Conflict: यमन के हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर सऊदी अरब पर हमला कर दिया है। हूतियों ने सऊदी की सेना और तेल के ठिकानों को निशाना बनाया है।
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भारत

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Tanay Mishra

Sep 17, 2026

Abdul-Malik Badr al-Din al-Houthi

अब्दुल-मलिक बद्र अल-दीन अल-हूती (Photo - @RT_on_X)

यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthis) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) के बीच जंग के हालात पैदा हो गए हैं। दोनों पक्षों के बीच अभी तक आधिकारिक तौर पर जंग नहीं छिड़ी है, लेकिन हमलों का सिलसिला दोनों तरफ से जारी है। अब हूतियों ने एक बार फिर सऊदी पर हमला कर दिया है।

सेना और तेल के ठिकानों को बनाया निशाना

हूतियों ने सऊदी अरब की सेना और तेल के ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमला कर दिया है। हूती विद्रोहियों के लीडर अब्दुल-मलिक बद्र अल-दीन अल-हूती (Abdul-Malik Badr al-Din al-Houthi) ने इस बारे में जानकारी दी है। हूतियों ने सऊदी के सैन्य ठिकानों और तेल के ठिकानों पर ड्रोन्स और मिसाइलें दागीं हैं।

सऊदी अरब को बताया झूठा

अल-हूती ने सऊदी अरब पर यमन में अपने हमलों को सही ठहराने के लिए प्रोपेगैंडा और झूठ का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। अल-हूती कहा, "वो हमारे लोगों के खिलाफ जो कुछ भी कर रहे हैं, उसे सही और उचित ठहराने की कोशिश करते हैं। इसके ज़रिए वो दूसरों को भी समर्थन जुटाने के लिए उकसाने और भड़काने की कोशिश करते हैं। सऊदी अरब ज़मीन पर अपनी सैन्य नाकामियों की भरपाई के लिए प्रोपेगैंडा और झूठ का सहारा ले रहा है।"

मक्का पर ड्रोन अटैक के दावे को किया खारिज

अल-हूती ने सऊदी अरब के उस दावे को भी खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि हूतियों ने पवित्र शहर मक्का की ओर ड्रोन दागा था। अल-हूती ने कहा, "सऊदी अरब अपनी प्रोपेगैंडा मशीन का इस्तेमाल कर रहा है। मक्का को निशाना बनाने की बात एक घिनौना झूठ है। हमने ऐसा कुछ भी नहीं किया।"

हूतियों और सऊदी के बीच विवाद की क्या है वजह?

यमन में संघर्ष 2014 के आखिर में तब शुरू हुआ जब हूतियों ने सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में दखल दिया। तभी से दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। हूतियों को ईरान (Iran) का समर्थन प्राप्त है तो वहीँ यमन की सेना को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है।