
हिज्बुल्लाह (फोटो - वॉशिंगटन पोस्ट)
इजराइल ने ईरान के साथ युद्धविराम कर लिया है। लेकिन सीजफायर को लेकर दोनों देशों के बीच जो दवाल हुई है, उससे ईरान और हिज्बुल्लाह के रिश्तों पर बड़ा असर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि युद्धविराम को लेकर ईरान और हिज्बुल्लाह के बीच काफी तनाव बढ़ सकता है।
लंदन के किंग्स कॉलेज में युद्ध अध्ययन के विशेषज्ञ समीर पुरी ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का सीजफायर वाला बयान शायद अमेरिका के साथ मिलकर तैयार किया गया है।
समीर पुरी ने आगे कहा कि इजराइल साफ कह रहा है कि इस युद्धविराम की डील में लेबनान को शामिल नहीं किया गया है। अगर ईरान अगले कुछ दिनों में बातचीत में लेबनान को भी डील में जोड़ने की मांग करेगा तो बात बिगड़ सकती है।
पुरी ने कहा कि इससे ईरान पर दबाव बढ़ जाएगा और उसका हेजबोल्लाह से रिश्ता प्रभावित होगा। विशेषज्ञ का कहना है कि ईरान को साफ संदेश दिया जाएगा कि अगर लेबनान को डील से बाहर रखने पर राजी नहीं हुए तो पूरा सीजफायर ही रद्द हो जाएगा।
पुरी ने बताया कि चाहे मामला जिस तरफ भी जाए, इजराइल ने ईरान के हिज्बुल्लाह को दिए जाने वाले पुराने समर्थन पर पहले से ज्यादा दबाव बना लिया है।
बता दें कि ईरान 1980 के शुरुआती सालों से हिज्बुल्लाह को हर तरह का सहयोग देता आ रहा है। अब यह विवाद उस मजबूत कड़ी को हिला सकता है। फिलहाल दोनों तरफ से बातचीत जारी है, लेकिन मतभेद साफ दिख रहे हैं।
इजराइल द्वारा लेबनान पर लगातार हमलों के बावजूद, हिज्बुल्लाह ने दो सप्ताह के युद्धविराम को स्वीकार कर लिया है। रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने समूह से जुड़े तीन लेबनानी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम के तहत, हिज्बुल्लाह ने बुधवार सुबह उत्तरी इजराइल और लेबनान में तैनात इजराइली सैनिकों पर गोलीबारी रोक दी।
हालांकि, इजराइल ने दक्षिणी लेबनान पर अपने हमले जारी रखे हैं और एक दक्षिणी शहर के लिए नया निकासी आदेश जारी किया है, जिससे संकेत मिलता है कि वह जल्द ही वहां हमला करेगा।
यह आदेश इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा यह कहने के बाद जारी किया गया है कि दो सप्ताह के ईरान-अमेरिका युद्धविराम में लेबनान शामिल नहीं होगा।
Published on:
08 Apr 2026 02:38 pm
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