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YouTube Ban पर भड़का ईरान, Trump का मजाक उड़ाने वाले वीडियो पर बवाल, बताई अमेरिका की साजिश

YouTube Ban: यूट्यूब ने डोनाल्ड ट्रंप का मजाक उड़ाने वाले प्रो-ईरानी ग्रुप के लेगो-स्टाइल चैनल को बैन कर दिया है। इस कार्रवाई पर ईरान ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे अमेरिका और इजरायल की सच्चाई दबाने की कोशिश करार दिया है।

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भारत

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MI Zahir

Apr 14, 2026

Trump AI Animation YouTube Ban

डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रतिबंधित यूट्यूब एआई एनिमेशन वीडियो का फोटो : X

Trump AI Animation: डिजिटल दुनिया में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बिग टेक कंपनियों की सेंसरशिप को लेकर एक नया अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब ने एक ऐसे प्रो-ईरानी ग्रुप के चैनल पर प्रतिबंध लगा दिया है, जो लेगो टॉयज के स्टाइल में एआई जनरेटेड एनिमेटेड वीडियो बनाता था। इस ग्रुप ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप का मजाक उड़ाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें दावा किया गया था कि "ईरान जीत गया"। यूट्यूब की इस सख्त कार्रवाई के बाद ईरान बुरी तरह भड़क गया है और उसने इसे अपनी आवाज और सच्चाई को दबाने की पश्चिमी साजिश बताया है।

अकाउंट पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है

'एक्सप्लोसिव मीडिया'नाम के इस प्रो-ईरानी ग्रुप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी दी कि यूट्यूब ने उनके अकाउंट को "हिंसक सामग्री" से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है। अहम और हैरान करने वाली बात यह है कि इस ग्रुप के अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स अभी भी सक्रिय हैं और उन प्लेटफॉर्म्स पर उनके कंटेंट को नियमों का उल्लंघन नहीं माना गया है।

क्या हमारे लेगो-स्टाइल एनिमेशन वास्तव में हिंसक हैं ? एक्सप्लोसिव मीडिया

यूट्यूब के इस अप्रत्याशित कदम पर हैरानी जताते हुए एक्सप्लोसिव मीडिया ने एक्स पर पोस्ट किया, "गंभीरता से! क्या हमारे लेगो-स्टाइल एनिमेशन वास्तव में हिंसक हैं?" यह सवाल अब इंटरनेट और तकनीक की दुनिया में बहस का विषय बन गया है कि क्या खिलौनों के रूप में बनाए गए एनिमेटेड व्यंग्य को सच में डिजिटल हिंसा को बढ़ावा देने वाला माना जा सकता है। इस ग्रुप ने फैसले को हास्यास्पद बताते हुए सवाल किया है कि क्या बच्चों के खिलौनों (लेगो) से बने एनिमेटेड वीडियो को वास्तव में हिंसक माना जा सकता है। उन्होंने इसे अपनी आवाज दबाने का अनुचित प्रयास बताया।

यह अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए अघोषित युद्ध की "सच्चाई"

ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर अपनी आधिकारिक और तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यूट्यूब के इस प्रतिबंध की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए अघोषित युद्ध की "सच्चाई" को दुनिया के सामने आने से रोकने का एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। ईरान का मानना है कि पश्चिमी मीडिया प्लेटफॉर्म्स अपनी सुविधानुसार नियमों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं ताकि ईरान के नैरेटिव (विमर्श) को वैश्विक पटल पर ब्लॉक किया जा सके।

बड़ी टेक कंपनियों की कंटेंट मॉडरेशन पॉलिसी पर गंभीर सवाल

यह पूरा मामला आधुनिक दौर में प्रोपेगेंडा, एआई के बढ़ते इस्तेमाल और बड़ी टेक कंपनियों की कंटेंट मॉडरेशन पॉलिसी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक तरफ जहां एआई तकनीक से वीडियो और एनिमेशन बनाना बेहद आसान हो गया है, वहीं दूसरी तरफ यूट्यूब जैसी कंपनियों के लिए यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि राजनीतिक व्यंग्य और वास्तविक हिंसा को बढ़ावा देने वाले कंटेंट के बीच की स्पष्ट लकीर कहां खींची जाए। फिलहाल, एक साधारण से लेगो एनिमेशन पर लगे इस बैन ने डिजिटल स्पेस में अंतरराष्ट्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।

यह सीधे तौर पर अमेरिकी सेंसरशिप: ईरान का विदेश मंत्रालय

ईरानी सरकार ने इसे सीधे तौर पर अमेरिकी सेंसरशिप करार दिया है। उनका कहना है कि यूट्यूब अमेरिका और इजरायल के युद्ध अपराधों को छिपाने और ईरान के पक्ष को दुनिया तक पहुंचने से रोकने के लिए एक टूल की तरह काम कर रहा है।

क्या दूसरे प्लेटफॉर्म्स भी करेंगे बैन ?

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एक्स (X) या टेलीग्राम जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी अमेरिकी दबाव में आकर 'एक्सप्लोसिव मीडिया' पर कोई कार्रवाई करते हैं या वे फ्री-स्पीच के नाम पर उन्हें अपना प्लेटफॉर्म देते रहेंगे।

यह है ईरान का अगला कदम

इस डिजिटल सेंसरशिप के जवाब में क्या ईरान अपने देश में पश्चिमी ऐप्स पर और अधिक सख्ती लागू करेगा या अपने साइबर-प्रोपेगेंडा के लिए डार्क वेब और अन्य सुरक्षित नेटवर्क्स का सहारा लेगा?

एआई एनिमेटेड और डीपफेक वीडियो का जम कर इस्तेमाल

इस खबर का सबसे बड़ा पहलू 'एआई और आधुनिक प्रोपेगेंडा वॉरफेयर' है। पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ अब नैरेटिव सेट करने के लिए एआई एनिमेटेड और डीपफेक वीडियो का जम कर इस्तेमाल हो रहा है। लेगो जैसे मासूम खिलौनों के फॉरमेट का उपयोग करके गंभीर भू-राजनीतिक संदेश देना एक नई और खतरनाक रणनीति है। टेक कंपनियों के एल्गोरिदम इस 'एनिमेटेड हिंसा' को पकड़ने और उसे मॉडरेट करने में अभी भी संघर्ष कर रहे हैं।