WHO : अमरीका विश्व स्वास्थ्य संगठन से बाहर हुआ तो चीन का दबदबा बढ़ेगा, जानिए कैसे?

-डब्लूएचओ में चीन का वित्त या व्यक्तिगत योगदान बड़ा नहीं है, लेकिन दखल बड़ा है
-अमरीका ने डब्लूएचओ का बजट घटाया तो चीन ने बढ़ा दिया

By: pushpesh

Updated: 30 Jun 2020, 12:34 AM IST

न्यूयॉर्क. विश्व स्वास्थ्य संगठन में इस वक्त चीन के 40 कर्मचारी हैं, जो संगठन कुल कर्मचारियों का एक फीसदी से भी कम है। मुख्यालय की नेतृत्व करने वाली टीम में चीन के एक और अमरीका के दो सदस्य हैं। अमरीका का वित्तीय योगदान 16 फीसदी के मुकाबले चीन का महज 1.5 फीसदी ही है। इसके अलावा पोलियो उन्मूलन, वैक्सीन या अन्य स्वाथ्य निधि में भी अमरीका, चीन से कहीं आगे है। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के चीन की ओर झुकाव के कई कारण मौजूद हैं। मसलन, चीन कई महामारियों का केंद्र रहा है। लिहाजा संगठन ने हाल के वर्षो में चीन के साथ मिलकर काफी काम किया है। इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति शृंखला, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उसने केंद्रीय भूमिका निभाई है। कोरोना महामारी के दौरान भी वायरस के प्रकोप से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन चीन के सहयोग पर काफी निर्भर रहा। 2009 में एच1एन1 महामारी के दौरान डब्लूएचओ की अवहेलना करते हुए मैक्सिकन नागरिकों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने और उत्तरी अमरीका में पोर्क उत्पादन बैन करने पर चीन के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। दो वर्ष बाद 2011 में बीजिंग ने ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की पहली बैठक की मेजबानी की, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग में डब्लूएचओ की भूमिका को और सशक्त बनाने को लेकर चर्चा की।

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संगठन के चुनाव में भी अहम भूमिका
2006 में चीन के कूटनीतिक सहयोग के कारण हांगकांग में स्वास्थ्य निदेशक मार्गरेट चैन 12 उम्मीदवारों को पीछे छोड़ डब्लूएचओ के महानिदेशक बने। 2012 में चैन फिर निर्विरोध चुन लिए गए। तब दूसरे प्रतिभागियों ने यह समझ लिया कि चीन के समर्थन के बिना ये निर्वाचन संभव नहीं है। पांच वर्ष बाद 2017 में चीन का प्रभाव नजर नहीं आया और इथोपिया के स्वास्थ्य मंत्री टेड्रोस अधेनोम घेब्रियेसस अफ्रीकी देशों के समर्थन से डब्लूएचओ के प्रमुख बने। लेकिन टेड्रोस ने बीजिंग से भी सहयोग और समर्थन मांगा। इसके बदले डब्लूएचओ की जीत के अगले ही दिन टेड्रोस ने ‘वन चाइना’ नीति पर चीन का समर्थन किया। यह संकेत है चीन की मर्जी के बिना डब्लूएचओ ताइवान को आमंत्रित नहीं करेगा। जुलाई 2018 में टेड्रोस बीजिंग में चीनी अधिकारियों से चर्चा के लिए कि संगठन को और मजबूत कैसे बनााय जा सकता है।

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ट्रंप से खींचतान चीन के प्रभाव में बाधा नहीं
डब्लूएचओ पर चीन का प्रभाव कोरोनावायरस प्रकोप के दौरा स्पष्ट हो गया। सूचना में विलंब के लिए ट्रंप ने चीन और डब्लूएचओ को फटकार लगाई। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बीमारी के प्रसार को रोकने में अपनाए गए चीन के मानकों की खूब तारीफ की है। हालात ऐसे हैं कि चीन विश्व स्वास्थ्य संगठन में निर्णायक हैसियत में आ सकता है। सिर्फ अमरीका का संगठन के साथ बने रहना ही इस परिस्थिति को टाल सकता है। लेकिन यदि अमरीका ने संगठन का साथ छोड़ा तो डब्लूएचओ नेतृत्व और समर्थन के लिए चीन का रुख करेगा। एक ओर जहां अमरीका ने डब्लूएचओ का बजट कम करने की घोषणा की है तो चीन ने कोरोना से निपटने के लए डब्लूएचओ को 30 मिलियन डॉलर की मदद दी है।

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