
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ((फोटो: IANS)
West Asia conflict: भारत ने बुधवार को पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की अवधि बढ़ाए जाने का स्वागत किया है। इस अवसर पर भारत ने क्षेत्र में शांति, संवाद और तनाव कम करने के लिए नई दिल्ली के निरंतर आह्वान को दोहराया।
पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों पर विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने शांति और स्थिरता बहाल करने के उद्देश्य से की गई पहलों का हमेशा समर्थन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सदैव शांति का पक्षधर रहा है। भारत सरकार उन सभी कदमों का स्वागत करती है जो क्षेत्र को स्थिरता की दिशा में ले जाते हैं। प्रवक्ता ने आशा व्यक्त की कि इस युद्धविराम से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।
रणधीर जायसवाल ने इस बात पर जोर दिया कि संघर्ष को समाप्त करने के लिए तनाव कम करना, संवाद और कूटनीति अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के कारण पहले ही व्यापक मानवीय पीड़ा हुई है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सहित व्यापार नेटवर्क बाधित हुए हैं। भारत ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से निर्बाध नौवहन और वैश्विक वाणिज्य प्रवाह सुनिश्चित करने की उम्मीद जताई है।
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मंगलवार को ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने की घोषणा के बाद आया है। ट्रंप ने तेहरान के नेतृत्व को बातचीत के लिए एक एकीकृत प्रस्ताव तैयार करने हेतु अतिरिक्त समय देने की आवश्यकता बताई है।
'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ट्रंप ने जानकारी दी कि यह निर्णय ईरान सरकार के आंतरिक मतभेदों और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों की अपीलों को देखते हुए लिया गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुरोध पर ईरान पर सैन्य कार्रवाई को फिलहाल स्थगित किया गया है। हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक राजनयिक प्रगति नहीं होती, अमेरिकी सेना सतर्क रहेगी और नाकाबंदी जारी रखेगी।
दूसरी ओर, ईरान ने भी वार्ता फिर से शुरू करने के संकेत दिए हैं, लेकिन इसके साथ एक शर्त रखी है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि तेहरान तभी बातचीत की मेज पर लौटेगा जब अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त कर देगा। ईरान इसे युद्धविराम समझौते का उल्लंघन मानता है। इरावानी के अनुसार, यदि नाकाबंदी हटाई जाती है, तो वार्ता का अगला दौर इस्तांबुल में हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान राजनीतिक समाधान के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी सैन्य आक्रमण का जवाब देने में भी सक्षम है।
भारत अपनी ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को लेकर सतर्क है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है।
हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों पर हुई गोलीबारी की घटना पर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त की थी। इस संबंध में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी राजदूत मोहम्मद फथली को तलब कर भारत का पक्ष रखा और जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों के आवागमन को सुगम बनाने का आग्रह किया।
Published on:
22 Apr 2026 10:46 pm
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