
Indian LPG Tanker Strait of Hormuz
Indian LPG Tanker Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरानी नौसेना की निगरानी और मार्गदर्शन में एक भारतीय एलपीजी (LPG) टैंकर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पार किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में संघर्ष के कारण वैश्विक शिपिंग रूट्स और ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा बढ़ गया है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह भारतीय टैंकर उन चुनिंदा जहाजों में शामिल था जिन्हें संवेदनशील जलक्षेत्र से गुजरने की अनुमति दी गई। यात्रा के दौरान जहाज लगातार ईरानी नौसेना के संपर्क में रहा, जिसने जहाज की पहचान, गंतव्य और क्रू से जुड़ी जानकारी एकत्र की। सभी क्रू सदस्य भारतीय थे और जहाज को एक तय मार्ग से गुजरने के निर्देश दिए गए, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान नियंत्रित तरीके से जहाजों को गुजरने दे रहा है।
इस मार्ग से गुजरना आसान नहीं था। हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कुछ नाविकों की मौत की भी खबरें हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा समुद्री बारूदी सुरंगों (Naval Mines) की खबरों ने भी जोखिम को और बढ़ा दिया है।
टैंकर को यात्रा के दौरान अपना ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद रखना पड़ा और GPS में भी व्यवधान का सामना करना पड़ा, जिससे यात्रा और जटिल हो गई।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जहाज करीब 10 दिनों तक पर्शियन गल्फ में एंकर पर खड़ा रहा। इसके बाद 13 मार्च की रात उसे पार करने की अनुमति मिली। इस दौरान क्रू ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए लाइफ राफ्ट समेत जरूरी तैयारियां भी कर ली थीं।
होर्मुज पार करने के बाद ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) में भारतीय नौसेना के जहाजों ने टैंकर को एस्कॉर्ट किया। इसके बाद जहाज सुरक्षित रूप से भारत की ओर रवाना हो गया। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में करीब 22 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना लगातार निगरानी और एस्कॉर्ट ऑपरेशन चला रही है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ईरान के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है और स्थिति के अनुसार ही समन्वय किया जा रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव न केवल शिपिंग बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए भी बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।
मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में जोखिम और अनिश्चितता बनी रह सकती है, जिससे भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बना रह सकता है।
Published on:
21 Mar 2026 07:18 pm
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