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जंगलों की कटाई के लिए ज़िम्मेदार उद्योगों को जमकर मिल रही फंडिंग, इंसानियत पर मंडरा रहा खतरा

दुनियाभर में कई उद्योग ऐसे हैं जिनकी वजह से जंगलों की कटाई हो रही है। लेकिन इसके बावजूद इन उद्योगों को जमकर फंडिंग मिल रही है। जंगलों की हो रही कटाई से इंसानियत पर खतरा मंडरा रहा है।

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भारत

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Tanay Mishra

Oct 15, 2025

Deforestation

Deforestation (Representational Photo)

दुनियाभर के जंगलों की सेहत बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े वित्तीय संस्थान और सरकारें अब भी ऐसे उद्योगों को फंडिंग मुहैया करा रही हैं जो जंगलों की कटाई के लिए ज़िम्मेदार हैं। ग्लोबल विटनेस की एक रिपोर्ट के अनुसार 2015 के पेरिस समझौते के बाद से बैंकों ने उन कंपनियों को 26 बिलियन डॉलर्स का फंड दिया है जो जंगलों की कटाई करती हैं। यह एक चिंताजनक स्थिति है।

जंगलों को बचाना मुश्किल

ग्लोबल विटनेस की रिपोर्ट बताती है कि कृषि उद्योग पिछले दशक में करीब 85% तक जंगलों की कटाई के लिए ज़िम्मेदार है। इन्हें हर साल औसतन 409 बिलियन डॉलर्स की सरकारी मदद मिलती है। जंगलों की रक्षा और पुनर्स्थापना के लिए सिर्फ 5.9 बिलियन डॉलर्स की इंटरनेशनल फंडिंग दी जाती है। क्लाइमेट फोकस की एक वैज्ञानिक के अनुसार जब तक जंगल काटने पर फायदे मिलते रहेंगे, तब तक उन्हें बचाना मुश्किल है।

पिछले कुछ साल में बिगड़ी स्थिति

साल 2021 में जब वैश्विक नेताओं और कंपनियों ने 2030 तक वनों की कटाई रोकने का वादा किया था, तब से स्थिति और भी बिगड़ गई है। 2023 में 81 लाख हेक्टेयर (करीब 2 करोड़ एकड़) जंगल खत्म कर दिए गए। यह क्षेत्र आधे इंग्लैंड के बराबर है। फॉरेस्ट डिक्लेरेशन असेसमेंट रिपोर्ट के अनुसार दुनिया अब अपने लक्ष्य से 63% पीछे है। हर साल वादों और हकीकत के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है।

एमेज़ॉन के जंगलों में लगी आग से और बिगड़ी स्थिति

एमेज़ॉन के जंगलों में पिछले साल लगी आग ने स्थिति और बिगाड़ दी। सूखे की वजह से विशाल रेन फॉरेस्ट का बड़ा हिस्सा जल गया था। इस आग से निकली कार्बन डाईऑक्साइड पिछले दो सालों के औसत से 7 गुना ज्यादा थी। यह जर्मनी के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से भी ज़्यादा है।