1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Iran Blockade: ईरान की नेवी तबाह, पाकिस्तान वार्ता की नाकामी से झल्लाए अमेरिका का बड़ा हमला, समंदर में दफन किए 158 जहाज

Obliterated:इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने ईरान की सख्त नाकाबंदी कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी नौसेना ने 158 ईरानी जहाजों को समंदर में तबाह कर दिया है, जिससे वैश्विक युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

MI Zahir

•

Updated: 13 Apr 2026, 8:59 PM IST

Naval Blockade of Strait of Hormuz by US

Naval Blockade of Strait of Hormuz by US

Military Action: पाकिस्तान वार्ता के मकसद में नाकामी के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और आक्रामक सैन्य कार्रवाई की है। इस्लामाबाद में चल रही वार्ता पूरी तरह से विफल होने के बाद, झल्लाए अमेरिका ने ईरान की चौतरफा समुद्री नाकाबंदी कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बहुत सख्त और चौंकाने वाला बयान जारी करते हुए ऐलान किया है कि अमेरिकी नौसेना ने ईरान के 158 जहाजों को समंदर की गहराइयों में दफन कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद से मध्य पूर्व समेत पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है।

ईरानी नौसेना का लगभग नामोनिशान मिटा

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के अनुसार, ईरान की नेवी अब पूरी तरह से तबाह हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 158 ईरानी जहाज अब समंदर के तल पर पड़े हैं और उन्हें पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। अमेरिका का यह 'किलर' एक्शन इतना अचानक और विध्वंसक था कि ईरानी नौसेना को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अमेरिका ने प्रमुख समुद्री रास्तों को सील कर दिया है और यह नाकाबंदी इतिहास की सबसे सख्त नाकाबंदियों में से एक मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य ईरान को सामरिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग करना है।

'फास्ट अटैक शिप्स' के लिए ट्रंप की खुली चेतावनी

इस महाविनाशकारी हमले के बीच अमेरिका ने ईरान के कुछ छोटे 'फास्ट अटैक शिप्स' (तेज हमलावर नौकाओं) को फिलहाल छोड़ दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने इन छोटी नौकाओं को निशाना इसलिए नहीं बनाया क्योंकि अमेरिकी सेना उन्हें अपने लिए कोई बड़ा खतरा नहीं मानती। हालांकि, इसके साथ ही ट्रंप ने एक बहुत ही सख्त चेतावनी भी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि ईरान का कोई भी जहाज या तेज हमलावर नौका अमेरिकी नाकाबंदी के आसपास भी भटकती है, तो उसे तुरंत और बेरहमी से खत्म कर दिया जाएगा।

ड्रग तस्करों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले सिस्टम का जिक्र

अपनी चेतावनी को और अधिक मारक बनाते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरानी नौकाओं को खत्म करने के लिए उसी त्वरित और क्रूर 'किल सिस्टम' का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका उपयोग अमेरिका समंदर के रास्ते ड्रग्स की तस्करी करने वाले कार्टेल के खिलाफ करता है। राष्ट्रपति ने अपनी इस आक्रामक नीति की सफलता का दावा करते हुए यह भी बताया कि समंदर के रास्ते अमेरिका में आने वाले 98.2 प्रतिशत ड्रग्स पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण देने के लिए पेश किया गया है कि अमेरिकी नौसेना की समुद्री सुरक्षा, रडार सिस्टम और मारक क्षमता पूरी तरह से अचूक है।

इस्लामाबाद वार्ता की नाकामी बनी बड़ी वजह

इस पूरे सैन्य एक्शन की जड़ में इस्लामाबाद में हुई हालिया वार्ता की नाकामी को माना जा रहा है। कूटनीतिक जानकारों को उम्मीद थी कि इस वार्ता से अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध कुछ कम होगा। लेकिन वार्ता बिना किसी नतीजे के बुरी तरह विफल रही। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका ने कूटनीति के बजाय अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ ईरान को घेरने और उसकी नौसैनिक क्षमता को पंगु बनाने का कड़ा निर्णय लिया।

वैश्विक प्रभाव और युद्ध की आहट

अमेरिका के इस कदम से वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल गए हैं। मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है और दुनिया के कई देश इस अचानक हुई सैन्य कार्रवाई से सकते में हैं। अब सभी की निगाहें ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। फिलहाल, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री व्यापार मार्ग और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़े हैं और युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।