
Iran Foreign Minister Abbas Araghchi Pakistan Visit (Image: ANI)
Iran Foreign Minister Pakistan Visit: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस वीकेंड पाकिस्तान दौरे पर पहुंच सकते हैं। इस संभावित यात्रा को अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अराघची एक छोटे सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचेंगे, जहां दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।
पाकिस्तान पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल कराने की कोशिश कर रहा है। माना जा रहा है कि अब्बास अराघची का यह दौरा उसी प्रयास का हिस्सा है। इससे पहले भी पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बैकचैनल बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी, हालांकि कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका था।
इस बीच अमेरिका की ओर से भी सख्त रुख देखने को मिल रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि ईरान के पास अभी भी समझौता करने का मौका है, लेकिन इसके लिए उसे अच्छा सौदा करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने ईरान से जुड़े जहाजों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है और वैश्विक स्तर पर नाकेबंदी को मजबूत किया जा रहा है।
तनाव का सबसे बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से सामान्य समय में दुनिया के करीब 20% तेल का व्यापार होता है। यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर सीधे वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि उन्होंने अमेरिकी सेना को होर्मुज में ईरानी छोटी नावों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का निर्देश दिया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर हो चुकी है और अमेरिकी नाकेबंदी पूरी तरह प्रभावी है। हालांकि, उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना से इनकार किया है।
वहीं ईरान की ओर से इन दावों को खारिज किया गया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि देश के भीतर किसी तरह का मतभेद नहीं है और सभी नेता एकजुट हैं। उन्होंने साफ किया कि ईरान किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है।
अराघची का पाकिस्तान दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है। ऐसे में यह यात्रा इस बात का संकेत हो सकती है कि कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
हालांकि, हालात बेहद जटिल बने हुए हैं और यह देखना अहम होगा कि इस बातचीत से कोई ठोस नतीजा निकलता है या नहीं। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस संभावित मुलाकात पर टिकी हुई हैं।
Updated on:
24 Apr 2026 08:45 pm
Published on:
24 Apr 2026 08:45 pm
